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अतुकांत कविता .... लड़ूँगी प्रभु से

सोच रही हूँ
लड़ूँगी प्रभु से
जब मिलूँगी पर वह भी
डर से
छुपा बैठा है , आता ही नहीं
बुलाने पर हमारे हमारी जिन्दगी को
तबाह किये बैठा है , जिस दिन भी
मिलेगा सुनाउँगी
उसे बहुत जानता हैं
वह भी शायद
इसी लिए मेरी जिन्दगी
की डोर को
ढील दिए
बैठा है ....
.
सविता मिश्रा
"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 925

Comment

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 7, 2013 at 11:05pm

सविता जी

ईश्वर आपकी इच्छा पूरी करे i

आप भी खूब कसर निकाले  i

मैने  भी कभी लिखा था -

हारा करू हरि सो हरुआय , पै  जीवन भे  ललकारा  करू i  

Comment by Neeraj Nishchal on December 7, 2013 at 10:48pm

अच्छी कविता है पर इस पे गौर से सोच लीजिये तो शायद आपको आपके
सवालों का जवाब मिल जाए

छुपाकर खुद को परदे में, तुझे हमने छुपा समझा ।

खता ये हो गयी हमसे , जो कुछ तेरे सिवा समझा ।

जो परदे में नही रहता , वही परदा नशीं है तू ।

Comment by Sushil Sarna on December 7, 2013 at 8:20pm

antrbhaavon ka sundr prastutikaran....bahut khoob...haardik badhaaee

Comment by ram shiromani pathak on December 7, 2013 at 8:05pm
सुन्दर प्रयास हुआ है आदरणीया। प्रयासरत रहें .... शुभ शुभ
Comment by Neelam Upadhyaya on December 7, 2013 at 6:45pm

बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति. बधाई स्वीकार करें. 

Comment by savitamishra on December 7, 2013 at 6:33pm

dhanyvaad प्राची sis ...पहली पोस्ट से सच में खुश हैं पहले की क्यों नहीं हुई पोस्ट गुस्सा था पर अब नियम अभी फिर से धयन से पढ़ा हमने क्युकी fb पर शेयर कर चुके थे तब देखा की fb की पोस्ट भी आप नहीं लेते ...हो सकता हैं पहले की  पोस्ट fb पर हो या अच्छी ना लिखी गयी हो .....फिलहाल बहुत बहुत आभार आपका दिल से

Comment by Meena Pathak on December 7, 2013 at 6:28pm

सोच रही हूँ
लड़ूँगी प्रभु से
जब मिलूँगी पर वह भी
डर से
छुपा बैठा है , आता ही नहीं........................बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति | बधाई आप को 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 7, 2013 at 6:16pm

मंच पर आपकी प्रथम प्रस्तुति का स्वागत है आदरणीया सविता मिश्रा जी 

ईश्वर से हर व्यक्ति अपनी समझ भर एक निजी रिश्ता सांझा करता है, कई बातें कहता है, सोचता है, कल्पनाएँ करता है..अलग अलग स्तर पर उसे महसूस करता है... ऐसी ही कुछ उलझी सुलझी सी उम्मीदों को जीती इस अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बाधाई.

Comment by savitamishra on December 7, 2013 at 6:10pm

धन्यवाद अरुन शर्मा भैया :) :)

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 7, 2013 at 6:05pm

आदरणीया सविता जी बहुत अच्छा प्रयास किया है आपने जब हालात ऐसे बन जाते हैं तो ईश्वर से लड़ना पड़ता है बधाई आपको इस प्रयास पर.

कृपया ध्यान दे...

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