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भंवरों ने घेरा

पहुंचाया अवसादों की गर्तो में

संयोग बड़ ही सुखकर थे जिनके

उनके ही वियोग भुजंग बने,लगे डसने

कौन शक्ति? जो हर क्षण

अपनी ही ओर हमें है खींच रही

कल से खींचा,आज छुड़ाया

जो आयेगा वो भी छुटेगा

नश्वरता में इक दिन जीवन ही डूबेगा 

क्षणभंगुरता से हो विकल हृदय

साश्वत खोज में जब भी तड़फा है

मोहवार्तों ने आलिंगन कर

जिज्ञासु तड़फ को मोड़ा है।

खार उदधि की हर विंदु में

रुचिकर रस का भास हुआ

भास भास ही सिद्ध हुआ 

सत कुछ भी तो दिखा नहीं

हे अविनाशी!

अविनाशी कर के भान करा दे

मेरी तड़फ को

जिसकी चिंगारी का 

कुछ बूंदों ने पल में नाश किया।

      -

विन्दु

(मौलिक,अप्रकाशित)

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Comment by Vindu Babu on December 14, 2013 at 2:00pm

टंकण त्रुटियों के लिए पुनः  क्षमा चाहती हूँ..शीघ्र ही सही करवा लूँगी।

ध्यानाकर्षण...!! क्या करना आदरणीय बृजेश सर,आप सभी ने मेरी अभिव्यक्ति को मान दिया...बहुत है।

'चिर सत्ता' को समर्पित हैम यह अभिव्यक्ति,इसलिए ध्यानाकर्षण आदि पर विशेष ध्यान भी नहीं।

आप सभी का बारम्बार आभार।

सादर

Comment by Vindu Babu on December 14, 2013 at 1:44pm

हार्दिक आभार आदरणीया अन्नपूर्णा दीदी।

आप यहाँ पधारीं...अच्छा लगा।

सादर

Comment by Vindu Babu on December 14, 2013 at 1:42pm

आदरणीया मीना दीदी शुक्रिया।

सादर

Comment by Vindu Babu on December 14, 2013 at 1:39pm

आदरणीय विजय सर आपकी उपस्थिति ही मुझे संबल प्रदान करती है।

इस साधारण से प्रयास पर आपकी प्रितिक्रिया पाकर बहुत अच्छा लगा।

सम्प्रेष्ण की परिपक्वता नहीं पर इसके भाव genuine हैं आदरणीय।

आपको उक्त पंक्तियाँ अच्छी लगी,जानकर  मनोबल बढ़ा।

आपका हार्दिक आभार आदरनीय।

सादर

Comment by Vindu Babu on December 14, 2013 at 1:32pm

आदरणीय आशुतोष जी आप यहाँ पधारे,प्रयास सार्थक हुआ।

सादर आभार आदरणीय

Comment by Vindu Babu on December 14, 2013 at 1:30pm

आदरणीय श्रीवास्तव महोदय आप की प्रतिक्रिया उत्साहवर्धन करती है।

स्नेह बनाये रखें आदरणीय।

सादर

Comment by Vindu Babu on December 14, 2013 at 1:28pm

आदरणीय जितेन्द्र जी आप भी मेरा हार्दिक आभार स्वीकारें।

सादर

Comment by Vindu Babu on December 14, 2013 at 1:27pm

आदरणीय गिरिराज सर बहुत शुक्रिया।

मैं अमल करूँगी।

सादर

Comment by Vindu Babu on December 14, 2013 at 1:25pm

सादर धन्यवाद आदरणीय उमेश महोदय।

Comment by Vindu Babu on December 14, 2013 at 1:24pm

आदरणीया गीतिका जी आपका आभार।

क्षमा करें टंकण में त्रुटि हो गयी।

सादर

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