For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

देश काल निमित्त की सीमाओं में जकड़े तुम 

और तुम्हारे भीतर एक चिरमुक्त 'तुम'

-जिसे पहचानते हो तुम !

उस 'तुम' नें जीना चाहा है सदा 

एक अभिन्न को-

खामोश मन मंथन की गहराइयों में 

चिंतन की सर्वोच्च ऊचाइंयों में 

पराचेतन की दिव्यता में.....

पूर्णत्वाकांक्षी तुम के आवरण में आबद्ध 'तुम'

क्या पहचान भी पाओगे 

अभिन्न उन्मुक्त अव्यक्त को-

एक सदेह व्यक्त प्रारूप में......?

(मौलिक और अप्रकाशित) 

Views: 1325

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Amod Kumar Srivastava on November 13, 2013 at 10:05pm

उस 'तुम' नें जीना चाहा है सदा ...... बहुत सुंदर रचना बधाई स्वीकार करें ... आ0 प्राची जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 13, 2013 at 9:26pm

अपने ’स्व’ को बूझ लेने का प्रक्रम सनातन है. यह देही साधन मात्र है जिसकी संज्ञा ’मैं’ या ’तुम’ से इंगित होती रही है.
यदि श्री मद्भग्वद्गीता के अनुसार ’..अस्थिता जनकादयः’ को मानक माना जाय तो सांसारिक कर्म को अन्यथा समझने की भूल होगी ही नहीं. उच्च सचेतावस्था का अर्थ ही है कि एक हाथ से तात्विकबोध की पराकाष्टा का टटोलना हो तो दूसरे हाथ से सांसारिकता के गूढ़तम को साधना हो. कविता के मुख्य पात्र का ढंग ऐसा ही होने से मन आश्वस्त हुआ है.
शुभ-शुभ


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 13, 2013 at 8:27pm

रचना में सन्निहित कथ्य आपको पसंद आया ..आपकी आभारी हूँ आ० शिवराम सिंह जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 13, 2013 at 8:25pm

अचना के भावदशा सम्प्रेषण पर आश्वस्त करते आपके अनुमोदन के लिए सादर आभार आ० अरुण निगम जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 13, 2013 at 8:10pm

रचना के भावों पर आपके अनुमोदन के लिए आभार आ० जितेन्द्र जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 13, 2013 at 8:03pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी 

इस अभिव्यक्ति की भाव परिधि में कुछ पल ठहरने के लिए आपका धन्यवाद 

सादर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 13, 2013 at 8:01pm

अभिव्यक्ति पर आपके अनुमोदन के लिए हार्दिक धन्यवाद प्रिय गीतिका जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 13, 2013 at 7:40pm

आदरणीय शरदिंदु जी 

प्रस्तुति की भाव दशा को गहनता से महसूस करने का आपका प्रयास...नत करता है. बहुत बहुत धन्यवाद.

रचना को स्पष्ट करने के क्रम में और यही कहना चाहूंगी कि आबद्ध चिरमुक्त 'तुम' तो आनंदस्वरुप है...उसका सिसकना कैसा....वो तो बस स्थित है अपनी high vibrational frequencies में.....same vibrational frequencies की ओर प्रवृत्त होना तो प्रकृति का नियम ही है...क्या एक इकाई में निहित मुक्तिबोध को प्राप्त सत्ता वैसे ही किसी और इकाई में निहित उस अव्यक्त सत्ता को पहचान सकती है... यही इस रचना में निहित है.

सादर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 13, 2013 at 7:27pm

अभिव्यक्ति की भाव दशा पर आपके अनुमोदन के लिए आभारी हूँ आदरणीया अन्नपूर्ण बाजपेयी जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 13, 2013 at 7:26pm

आ० गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी 

रचना की अंतर्धारा आपको पसंद आयी..यह जानना सुखाकर है...आपका हृदय से आभार.

सादर.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
10 minutes ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
yesterday
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
Friday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
May 13

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
May 13
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service