For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बताशा लगती हो तुम

बताशा लगती हो तुम

.

हिंदी के समान प्यारी, कोमल, सुरीली, मृदु,

घोले जो मिठास ऐसी भाषा लगती हो तुम,

जीवन में नीरसता, जैसे चहुँ ओर फैले,

तिमिर निराशाओं में आशा लगती हो तुम,

आँखें मूँद कर मृतप्राय हुए चित में यूँ,

सुंदर, सजग अभिलाषा लगती हो तुम,

नेह भरी देह का जो, रस पियूँ घोल-घोल,

चाशनी में डूबा सा बताशा लगती हो तुम।

----------------------------------- सुशील जोशी

“मौलिक व अप्रकाशित”

Views: 1276

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on November 10, 2013 at 8:58pm

हिंदी के सामान प्यारी ,तिमिर हटाने वाली ,आशा जगाने वाली ,अभिलाषा वाह वाह सुनकर कौन पत्नी खुश नहीं हो जायेगी... 

नेह भरी देह का जो, रस पियूँ घोल-घोल,

चाशनी में डूबा सा बताशा लगती हो तुम।------हाहाहा देखियेगा डाइबिटीज न हो जाये :):):)

Comment by ram shiromani pathak on November 10, 2013 at 8:23pm

आदरणीय सुशील भाई जी,सुन्दर प्रस्तुति …बहुत बहुत बधाई आपको। ..सादर 

Comment by Sushil.Joshi on November 10, 2013 at 7:29pm

रचना पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार आ0 केवल भाई जी....

Comment by Sushil.Joshi on November 10, 2013 at 7:28pm

वाह वाह..... क्या खूब कहा है आ0 अरुन निगम जी..... वाह.... आपका अनुमोदन तो सचमुच आशीर्वाद स्वरूप होता है...... बहुत बहुत आभार.....

Comment by Sushil.Joshi on November 10, 2013 at 7:26pm

रचना पर आपकी विस्तृत टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार आ0 जितेन्द्र भाई जी......

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on November 10, 2013 at 12:49pm

आदरणीय सुशील भाई जी, बहुत खूब! सुन्दर विचार। हार्दिक बधाई स्वीकारें।  सादर,


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on November 10, 2013 at 8:35am

सुन्दर सुशील सभी,हमें उपमान लगे,

भीग गया तन-मन, वाह रसधार में 

प्रेम में जो डूब जाये,प्रेम का बताशा खाये 

तट में वो मजा कहाँ,जो है मँझधार में................... 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on November 10, 2013 at 12:38am

आदरणीय डा. गोपाल जी// मैंने   पहली  बार किसी को  अपनी प्रेमिका हिंदी  जैसी  प्यारी कोमल सुरीली व् मृदु क्हते सुना//की प्रतिक्रिया के साथ सहमत हूँ, व् मैंने भी बताशा पहली बार सुना, आदरणीय शुशील जी रचना में इन दोनों कहन से एक अजीब अंदाज में सुन्दरता का बखान हो रहा है, वैसे ही जैसे कोई मासूम बच्चा, अपनी मासूमियत में किसी की तारीफ करे, पूर्णत: निर्मल मन से..रचना पर बहुत बहुत बधाई स्वीकारें

Comment by Sushil.Joshi on November 9, 2013 at 9:14pm

बहुत बहुत आभार आपका आ0 अखिलेश जी.....

Comment by Sushil.Joshi on November 9, 2013 at 9:14pm

स्नेहिल टिप्पणी हेतु सादर आभार आ0 अरुन भाई......

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"साथियों, आप सभी के बहुमूल्य विचारों का स्वागत है, इस बार के लिए निर्णय लिया गया है कि सभी आयोजन एक…"
5 hours ago
Admin posted discussions
5 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
6 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"नीलेश भाई के विचार व्यावहारिक हैं और मैं भी इनसे सहमत हूँ।  डिजिटल सर्टिफिकेट अब लगभग सभी…"
Friday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सादर नमस्कार, अब तक आए सभी विचार पढ़े हैं। अधिक विचार आयोजन अवधि बढ़ाने पर सहमति के हैं किन्तु इतने…"
Friday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इन सुझावों पर भी विचार करना चाहिये। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"यह भी व्यवहारिक सुझाव है। इस प्रकार प्रयोग कर अनुभव प्राप्त किया जा सकता है। "
Thursday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"हाल ही में मेरा सोशल मीडिया का अनुभव यह रहा है कि इस पर प्रकाशित सामग्री की बाढ़ के कारण इस माध्यम…"
Thursday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय प्रबंधन,यह निश्चित ही चिंता का विषय है कि विगत कालखंड में यहाँ पर सहभागिता एकदम नगण्य हो गयी…"
Thursday
amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
Tuesday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
Tuesday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service