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ग़ज़ल : हमेशा के लिए गायब लबों से मुस्कुराहट है

बह्र : हज़ज मुसम्मन सालिम
१२२२, १२२२, १२२२, १२२२,

हमेशा के लिए गायब लबों से मुस्कुराहट है,

मुहब्बत में न जाने क्यों अजब सी झुन्झुलाहट है,

निगाहों से अचानक गर बहें आंसू समझ लेना,
सितम ढाने ह्रदय पर हो चुकी यादों की आहट है,

दिखा कर ख्वाब आँखों को रुलाया खून के आंसू,
जुबां पे बद्दुआ बस और भीतर चिडचिड़ाहट है,

चला कर हाशिये त्यौहार की गर्दन उड़ा डाली,
दिवाली की हुई फीकी बहुत ही जगमगाहट है,

बदलने गाँव का मौसम लगा है और तेजी से,
किवाड़ों में अदब की देख होती चरमराहट है...

 

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment by अरुन 'अनन्त' on October 25, 2013 at 12:18pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय सुशील भाई जी स्नेह यूँ ही सदैव बना रहे

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 25, 2013 at 12:17pm

हार्दिक आभार आदरणीया सरिता जी स्नेह यूँ ही बना रहे

Comment by vijay nikore on October 25, 2013 at 12:07pm

गज़ल में बहुत खूबसूरत खयाल हैं। बधाई, आदरणीय अरून जी।

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 25, 2013 at 9:37am

निगाहों से अचानक गर बहें आंसू समझ लेना,
सितम ढाने ह्रदय पर हो चुकी यादों की आहट है,......वाह! क्या बात है

लाजवाब गजल, एक से बढकर एक शेर, दिली दाद कुबूल कीजिये, आदरणीय अरुण अनंत जी

Comment by Sushil.Joshi on October 25, 2013 at 5:37am

दिखा कर ख्वाब आँखों को रुलाया खून के आंसू,
जुबां पे बद्दुआ बस और भीतर चिडचिड़ाहट है,........... क्या बात है..... वाह..

और जो शेर मेरे अंतर्मन को छू गया...

बदलने गाँव का मौसम लगा है और तेजी से,
किवाड़ों में अदब की देख होती चरमराहट है....... वाह..... बदलते गाँव के हालातों पर अच्छा शेर है आ0 अरुन भाई...... बहुत बहुत बधाई इस प्रस्तुति के लिए....

Comment by Sarita Bhatia on October 24, 2013 at 11:29pm

खुबसूरत गजल के लिए हार्दिक बधाई अरुण 

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 24, 2013 at 10:40pm

आदरणीय एडमिन महोदय जी विनम्र अनुरोध है कि मतले के सानी को ऐसा कर दें एवं चिडचिढाहट को  चिडचिड़ाहट कर दें.

मुहब्बत में न जाने क्यों अजब सी झुन्झुलाहट है,

अग्रिम हार्दिक आभार आपका सादर

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 24, 2013 at 10:38pm

आदरणीय भ्राताश्री आपसे सराहना पाकर फूल के कुप्पा हो गया हूँ प्रयास आपको अच्छा लगा सुखद अनुभूति हुई. आपके द्वारा बताया गया मिसरा सानी जबरदस्त है. निःसंदेह ऐसा करने से उलझन ख़तम हो जाएगी. आशीष एवं स्नेह यूँ ही बना रहे

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 24, 2013 at 10:33pm

हार्दिक आभार आदरणीय वैद्यनाथ भाई जी बहुत बहुत शुक्रिया

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 24, 2013 at 10:18pm

आदरणीय गिरिराज जी बहुत बहुत शुक्रिया टाइपिंग मिस्टेक की वजह से ऐसा हो गया ठीक कर लेता हूँ स्नेह यूँ ही बना रहे

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