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कविता --- मेरे प्रियवर....................... अन्नपूर्णा

मेरे  प्रियवर .............

स्नेह सिक्त हृदय

तुम रहते  प्राण बन

जीवन की अविरल धारा

तुम रहते अठखेलियाँ बन

तुम मेरे प्रियवर.............

मद युक्त नयन

तुम रहते काजल रेख बन

शीश पर चमकते

यों सिंदूरी रेख बन

तुम मेरे प्रियवर.....................

तुमसे ही है जीवन

हर शाम सिंदूरी

फूलों सा महके सिंगार

संग तुम्हारा  अनुपम फुलवारी ॥

मेरे प्रियवर.................

.

अन्नपूर्णा बाजपेई

 

मौलिक एवं अप्रकाशित

 

 

 

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Comment by गिरिराज भंडारी on October 24, 2013 at 6:26pm

आदरणीया अन्नपूरणा जी , बहुत सुन्दर भाव से रची आपकी रच्ना के लिये आपको बधाई !!!!!

Comment by Dr Ashutosh Mishra on October 24, 2013 at 4:53pm

आदरणीय अन्नपूरना जी ..इस सुंदर रचना पर मेरी तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं 

कृपया ध्यान दे...

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