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कविता --- मेरे प्रियवर....................... अन्नपूर्णा

मेरे  प्रियवर .............

स्नेह सिक्त हृदय

तुम रहते  प्राण बन

जीवन की अविरल धारा

तुम रहते अठखेलियाँ बन

तुम मेरे प्रियवर.............

मद युक्त नयन

तुम रहते काजल रेख बन

शीश पर चमकते

यों सिंदूरी रेख बन

तुम मेरे प्रियवर.....................

तुमसे ही है जीवन

हर शाम सिंदूरी

फूलों सा महके सिंगार

संग तुम्हारा  अनुपम फुलवारी ॥

मेरे प्रियवर.................

.

अन्नपूर्णा बाजपेई

 

मौलिक एवं अप्रकाशित

 

 

 

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Comment by annapurna bajpai on October 25, 2013 at 1:16pm

आदरणीय सुशील जोशी जी आपका हरदिक आभार । 

Comment by annapurna bajpai on October 25, 2013 at 1:15pm

आदरणीय अखिलेश जी आपका हार्दिक आभार ।

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 25, 2013 at 11:25am

प्रिय को समर्पित बेहद सुन्दर सुकोमल भाव भरी रचना बहुत बहुत बधाई स्वीकारें

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 25, 2013 at 11:19am

बेहद सुंदर भाव, बड़ी खूबसूरती से सार्थक सुंदर शब्दों से, पिरोई कविता पर बधाई स्वीकारें आदरणीया अन्नपूर्णा जी

Comment by Sushil.Joshi on October 25, 2013 at 5:19am

सुंदर मखमली भावों से सुसज्जित इस कविता हेतु हार्दिक बधाई आ0 अन्नपूर्णा जी...

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on October 24, 2013 at 11:43pm

 आ. अन्नपूर्णा जी  सुंदर कविता की हार्दिक बधाई 

Comment by annapurna bajpai on October 24, 2013 at 9:21pm

आपका हार्दिक आभार आ0 केवल भाई जी । 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 24, 2013 at 9:07pm

 आ0 अन्नपूर्णा जी,  सादर प्रणाम!  वाह! बहुत ही कोमल भावों से पूर्ण सुन्दर रचना।............ हार्दिक बधार्इ स्वीकारें।  सादर,   

Comment by annapurna bajpai on October 24, 2013 at 6:37pm

आदरनीय डॉ आशुतोष जी , गिरिराज भण्डारी जी आपका हार्दिक आभार । 

Comment by vijay nikore on October 24, 2013 at 6:35pm

बहुत ही कोमल भाव हैं... रचना अच्छी लगी। बधाई आदरणीया अन्नपूर्णा जी।

सादर,

विजय निकोर

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