For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल.....खंज़र चुभा किस धार से

2212/2212/2122/212

 दिल में तुम्हारे है जो मुझको बताना प्यार से

यूँ भूल कर हमको भला क्या मिला संसार से

यूँ जानकर रुसवा किया आज महफ़िल में भला 

जो तोड़कर नाता चले क्यूँ भला इस पार से

चुप सी है धड़कन मेरी अब दिल भी है खामोश तो

घायल हुआ दिल मेरा खंज़र चुभा किस धार से

नादान हूँ मैं या कि अहसान उनका है जरा 

वो रोक देते हैं मुझे शर्त कि दीवार से

वो प्यार के मंजर हमें आज भी भूले नहीं

दिल भी दिये,ख़त भी लिखे सब छुपा संसार से 

जो आँख में है प्यार वो क्यूँ दिखा ना यार को

जब राह देखा था कोई यूँ बड़े आसार से

अब सोहनीं, लैला कहाँ हीर की बातें करें

बस दिन गुज़रता था यहीं यार के दीदार से

तू छोड़ कर चल दे यहाँ प्यार की राहें जरा

फिर रोक ले न 'रवि' कोई यार के बाज़ार से

================================

मौलिक और अप्रकाशित-अतेन्द्र कुमार सिंह 'रवि'

================================

Views: 1022

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 30, 2013 at 9:48pm

भाई अतेन्द्र जी मेरे कहे को मान देने के लिये आपका शुक्रिया

Comment by Atendra Kumar Singh "Ravi" on October 30, 2013 at 9:18pm

शिज्जू जी...आपके अनुसार हमनें मिसरे को आपके अनुसार कर लिया है ...मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद

Comment by Atendra Kumar Singh "Ravi" on October 28, 2013 at 8:18pm

सुझाव के ले लिए बहुत बहत शुक्रिया शिज्जू जी ....कोशिश करते हैं ...धन्यवाद


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on October 27, 2013 at 11:36pm

//दिल में तुम्हारे है जो मुझको बताना प्यार से//

भाई अतेन्द्र जी आप मिसरे को यूँ कर लें तो ये आपकी दी हुई बह्र के मुताबिक हो जायेगी


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 27, 2013 at 10:26pm

आपके शब्द तो मिसरे के वज़्न में सटीक बैठेगा. मग़र बताना की जगह बताइये करना होगा जोकि संभव नहीं होगा. और बताना रहने दिया गया तो शुतर्ग़ुर्बा का दोष होगा.

अतः मतले के उला पर फिर से सोचें.

हार्दिक शुभेच्छाएँ.

Comment by Atendra Kumar Singh "Ravi" on October 27, 2013 at 9:02pm

सौरभ सर को सादर प्रणाम ...आपने जो मार्गदर्शन दिया हम आपके बहुत आभारी हैं ...तुम्हारे में मात्रा शायद होना चाहिए 122...क्या इसके स्थान पर आपके  कर सकतें हैं ...


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 25, 2013 at 9:45pm

आप यदि तुम्हारे की मात्रा पर बात करते हैं, भाई अतेन्द्रजी,  तो मेरा हार्दिक सुझाव इस पर यही होगा कि आप स्वयं को थोड़ा समय दें. और मंच पर उपलब्ध ग़ज़ल के पहले पाठ दर पाठ पढ़ लें.

शुभेच्छाएँ.

Comment by Atendra Kumar Singh "Ravi" on October 25, 2013 at 9:24pm

सौरभ सर ...कृपया आप हमारी ग़ज़ल को देखकर जो प्रतिक्रिया दी है उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद और उस पर हम विचार कर रहें हैं पर हम आपसे यह भी आशा करते हैं कि मतले में संशोधन किस प्रकार किया जा सकता है ...शायद हमनें  "है तुम्हारे दिल में " ह कि मात्र को गिराकर १ गिना है .....उचित मार्गदर्शन करें हम आपके आभारी रहेगें .....धन्यवाद

Comment by Atendra Kumar Singh "Ravi" on October 25, 2013 at 9:17pm

जीतेन्द्र जी,डॉ अनुराग जी सुशील जी आप सभी को सहृदय धन्यवाद ....

Comment by Sushil.Joshi on October 24, 2013 at 9:32pm

शानदार गज़ल के लिए हार्दि बधाई आ0 अतेन्द्र कुमार जी......

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
Sunday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Saturday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Saturday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Jan 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service