For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बर्ताव
बर्ताव का अर्थ -- स्पर्श !
मुलायम नहीं..
गुदाज़ लोथड़ों में
लगातार धँसते जाने की बेरहम ज़िद्दी आदत

तीन-तीन अंधे पहरों में से
कुछेक लम्हें ले लेने भर से
बात बनी ही कहाँ है कभी ?


चाहिये-चाहिये-चाहिये.. और और और चाहिये
सुन्न पड़ जाने की अशक्तता तक
बस चाहिये

आगे,
देर गयी रात 

उन तीन पहरों की कई-कई आँधियों के बाद 
लोथड़े की
तेज़धार चाकू की निर्दयी नोंक
खरबूजा-खरबूजा खेलती है
सुन्न पड़े के साथ
बेमतलब सी भोर होने तक.

*******************************

-सौरभ

(मौलिक और अप्रकाशित)

 

Views: 1258

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 17, 2013 at 4:42pm

आदरणीय अरुण भाईसाहब, आपकी बधाई और बड़ाई .. . जय हो.. जय हो...   :-))))

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 17, 2013 at 4:38pm

रचना को पसंद करने औरथोचित सम्मान देने के लिए आपका सादर धन्यवाद आदरणीया शशिजी, आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी, भाई शिज्जू जी, भाई राहुलदेवजी.

आदरणीया सरिताजी, आदरणीय जवाहलालजी, आदरणीया गीतिकाजी, भाई रमेश जी,  भावाभिव्यक्ति में तनिक क्लिष्टता है इसे मैं स्वीकार करता हूँ. फिर भी मान रख लेने के लिए सादर धन्यवाद.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 17, 2013 at 4:33pm

//कहीं कहीं अतिक्रमित  होती सम्बेदनहीनता , कहीं शोषण की पराकाष्ठा, कहीं अपनी डफली अपना राग ..ये सब तो शाब्दिक अर्थ है ..पर माजरा कुछ और ही लग रहा है //

डॉक्टर साहब, आपने सामाजिक विसंगतियों को इंगितों में अभिव्यक्त होते देखा-पढ़ा है. और वही कुछ साझा हुआ है. आपने रचना को मान दिया यह मेरे लिए कम बड़ी बात नहीं.
सादर

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on October 17, 2013 at 4:06pm

पशु से कसाई का रिश्ता जग प्रसिद्ध है। कसाई पल में पशु का उद्धार कर देता है यह जानते हुए भी कि अगले जनम में उसे पशु और पशु को कसाई होना है। लेकिन यहाँ तो दोनों मानव हैं। एक कसाई बनकर दूसरे से पशुता का व्यवहार करे अपनी तृप्ति के लिए वह भी जीवन भर सोचकर ही.....। पता नहीं यह कसाई अगले जन्म में क्या बनेगा ? आ. सौरभ भाई बधाई घनी अंधेरी रात की वारदात पर रोशनी डालने के लिये ।... सादर ।

 

Comment by Sarita Bhatia on October 17, 2013 at 1:27pm

बार बार पढना पड़ता है आदरणीय सौरभ जी आपकी रचना को समझने के लिए ,गहरी बात 

Comment by CHANDRA SHEKHAR PANDEY on October 17, 2013 at 4:23am

माननीय सौरभ सर, मानवीय रिश्तों मे समाहित विद्रूपता और शारीरिक आयामों के विकृत पक्ष तक सीमित हो चुके मानवीय संबंधों को सुन्दरता से चित्रित करने हेतु बधाई। आत्मिक पक्षों से विमुख निकॄष्टतम शारीरिक अधस्तल में मोक्ष खोजते परपीड़ा मे सुख की मॄगमरीचिका तलाशते मानव की अधोगति का मार्मिक चित्रण। कोटिशः बधाईयाँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on October 17, 2013 at 12:04am

अव्यक्त को व्यक्त कर पाना लगभग असम्भव सा कार्य है और असम्भव को सम्भव कर पाना ही शायद रचनाकर्म है. आदरणीय सौरभ भाई जी "रिश्ते" को नमन.................

Comment by रमेश कुमार चौहान on October 16, 2013 at 10:38pm

आदरणीय आपकी इस रचना को दस बार पढकर आपको नि:शब्द हो नमन करता हूँ ।

Comment by वेदिका on October 16, 2013 at 8:30pm

हाँ ! एकदम सही लिखा आपने|

तारीफ के बोल कह पाने मे तो सक्षम नही हूँ, अपितु अंतरतम से आभार आपने ये रचना हमसे साझा की|

सादर !! 

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on October 16, 2013 at 8:04pm

बार बार पढूं, समझूं ... बस इतना ही कहूं ! सादर महोदय ...

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
16 hours ago
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Tuesday
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service