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लघुकथा : गिफ्ट (गणेश जी बागी)

साफ साफ बताओं, आख़िर बात क्या है ? जबसे तुम अपनी छोटी बहन की शादी से लौटी हो, तुम्हारा मूड उखड़ा उखड़ा है और ढंग से बात भी नही कर रही हो, प्रकाश नें अपनी पत्नी नीतू से पूछा | 
"कुछ नही बस यूँ ही" 
"देखो 'बस यूँ ही' कहने से काम नही चलने वाला, तुम्हे मेरी कसम, सच सच बताओं हुआ क्या ?"

"प्रकाश आपने मेरी बहन की शादी मे जो अँगूठी गिफ्ट की थी न, वह किसी को पसंद नही आयी, भाभी और माँ ने आपका खूब मज़ाक उड़ाया, वो लोग कह रही थीं कि यह घटिया अँगूठी कहाँ से खरीदी है, एक तो बेहद हल्की है और डिजाइन भी देहाती टाइप, चेहरा लटकाए नीतू एक साथ बोल गयी | 

"हूउउउ तो यह बात है, अरे भाई तुम्हे तो पता ही है आजकल पैसे की दिक्कत चल रही है इसलिए अँगूठी खरीदी कहाँ, शादी में तुम्हारी माँ ने जो अँगूठी मुझे दी थी वो नई ही पड़ी थी उसी को साफ करवा कर गिफ्ट कर दिया था |

(मौलिक व अप्रकाशित)

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 16, 2013 at 9:23pm

आभार आदरणीय विजय मिश्र जी, जय अम्बे । 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 16, 2013 at 9:22pm

टिप्पणी हेतु बहुत बहुत आभार प्रिय शुभ्रांशु भाई, अगर अँगूठी पहचान ली गई होती तो फिर यह लघुकथा भी न जनमती :-)


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 16, 2013 at 9:00pm

गिफ्ट पसंद करने हेतु आभार आदरणीया मंजरी पाण्डेय जी :-)


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 16, 2013 at 8:59pm

आदरणीया वंदना जी, आपकी टिप्पणी सदैव उत्साहवर्धन करती है, बहुत बहुत आभार । 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 16, 2013 at 8:58pm

आदरणीय सुशील भाई साहब,लघुकथा आपको पसंद आई यह मेरे लिए ख़ुशी की बात है, आप कहें तो कथा नायक का नाम "सुशील" ही रख दूँ हा हा हा हा हा हा,

बहुत बहुत आभार । 

Comment by shashi purwar on October 16, 2013 at 5:10pm

:) waah karara ................karara jabab , bahut acchi lagi laghukatha , aaj ka katu satye ganesh ji . badhai aapko

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 16, 2013 at 4:57pm

पति की यह बात पत्नी का मूड और बिगाड़ गयी | ऐसे बाते रिश्तेदारों के यहाँ शादियों में अक्सर सुनने को मिलते है |

पुराने जमाने में तो एक बहु के जेवर से माँ बाप अपने दुसरे लडके का विवाह भी कर लाया करते थे | पर अब किसी को

सहन नहीं होता | लघु कथा में गिफ्ट से जुड़े भावनात्मक सम्बन्ध,महंगाई की मार और मार्मिक दर्द की झलक बताने

में सफल रही है | हार्दिक बधाई आदरणीय श्री गणेशजी  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 16, 2013 at 10:48am

गिफ्टों से रिश्तों  की वेल्यु निर्धारित होती है आजकल शादी विवाहों में ऐसे सीन हर जगह देखने को मिल जाते हैं ,दूसरे के गिफ्ट में कमी निकालने मैं पीछे नहीं रहते लोग ,उस गिफ्ट के पीछे भावना चाहे तड़प तड़प कर दम तोड़ दे ,उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता,मर्म और सन्देश देने में पूर्णतः कामयाब है लघु कथा बहुत- बहुत बधाई आदरणीय गणेश जी   


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 15, 2013 at 9:24pm

आदरणीया महिमा जी, आम बातों के मध्य ही मेरी लघुकथाएँ निकला करती हैं, उत्साहवर्धन करती टिप्पणी हेतु बहुत बहुत आभार| 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 15, 2013 at 9:17pm

आदरणीय अभिनव अरुण भाई जी, आपकी टिप्पणी सदैव उत्साहवर्धन करती है, बहुत बहुत आभार | 

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