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उठते बैठते बस एक ही ख्याल हुआ

उठते बैठते बस एक ही ख्याल हुआ
क्यूँ जीना भी इस कदर मुहाल हुआ

लुटी आबरू तो चुप हैं सफ़ेद-पोश
ख़ामो ख्वाह की बातों पर बवाल हुआ

जलाता है रावण खुद अपना ही बुत
तमाशा ये देखो हर साल हुआ

जुबां शीरीं और खंज़र हाथ में है
"विश्वास" करना भी अब इक सवाल हुआ

सोचता हूँ बन जाऊं मैं भी नासेह
उतरा जो इस धंधे में मालामाल हुआ

घोटाले बने है सीढी तरक्की की
सियासत का ये फन भी कमाल हुआ

सरताज-ए-कायनात ये वतन मेरा
चंद कमज़र्फों के हाथों कंगाल हुआ


*मौलिक एवं अप्रकाशित*

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Comment by Praveen Verma 'ViswaS' on October 4, 2013 at 1:53pm

बहुत बहुत धन्यवाद भाई अनन्त जी.

Comment by अरुन 'अनन्त' on October 4, 2013 at 12:02pm

आदरणीय प्रवीन सर्वप्रथम आपका ओबीओ परिवार में हार्दिक स्वागत है, आपका प्रयास बहुत ही अच्छा हुआ थोडा और समय देकर आप इसे ग़ज़ल में परिवर्तित कर सकते हैं. इसी मंच पर पाठशाला में जाकर ग़ज़ल की जानकारी हासिल कर सकते हैं आप. इस प्रयास हेतु बधाई स्वीकारें.

Comment by Praveen Verma 'ViswaS' on October 4, 2013 at 11:50am

भाई ब्रजेश नीरज जी, आपने एकदम उचित सलाह दी है परन्तु मेरा बह्र-ज्ञान अभी शैशवावस्था में है . मैं आगे की रचनाओं में प्रयास करूँगा .

Comment by Praveen Verma 'ViswaS' on October 4, 2013 at 11:44am

सभी अग्रजों का अपने आशीर्वाद क लिए सादर धन्यवाद ।

Comment by Abhinav Arun on October 4, 2013 at 10:54am

अच्छी कविता है ..आदरणीय बधाई !!

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on October 4, 2013 at 9:18am

सब की पोल खोलती है गज़ल बधाई प्रवीण भाई ।

Comment by बृजेश नीरज on October 4, 2013 at 9:05am

बहुत अच्छा प्रयास है आपका. आपको हार्दिक बधाई!

भाई जी, एक निवेदन है कि यदि ग़ज़ल कहने की कोशिश कर रहे हैं तो बहर का जिक्र कर देना रचनाकार और पाठक दोनों के लिए अच्छा होता है. 

Comment by Sushil.Joshi on October 4, 2013 at 7:44am

बहुत सुंदर कृति है आदरणीय प्रवीन भाई जी.....

Comment by डॉ. अनुराग सैनी on October 3, 2013 at 9:48pm

वाह ! अति उम्दा , आपको हार्दिक बधाई ! बेहतरीन प्रस्तुति !

Comment by annapurna bajpai on October 3, 2013 at 9:08pm


घोटाले बने है सीढी तरक्की की 
सियासत का ये फन भी कमाल हुआ............... बहुत सही बात कही आपने आ0 प्रवीण वर्मा जी आपको इस नज्म हेतु  बधाई । 

कृपया ध्यान दे...

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