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सेमीनार में “कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न” विषय पर अपना भाषण देकर जब प्रिंसीपल साहिब स्टेज से उतरे तो सभी ओर तालियों की गड़गड़ाहट व वाहवाही गूंज रही थी,  सभी लोग बारी-बारी प्रिंसीपल साहिब को बधाईयां दे रहे थे। इसी क्रम में जब एक जूनियर अध्यापिका ने प्रिंसीपल साहिब को बधाई दी तो उन्हे लगा जैसे किसी ने सरे-बाजार उन्हे नंगा कर दिया हो।

- मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 5, 2016 at 5:34pm

छोटी सी कथा में बहुत कुछ कह दिया आदरणीय रवि सर | बहुत बधाई |

Comment by Alka Gupta on November 18, 2013 at 2:34pm

कटु सत्य.....अक सराहनीय रचना ...हार्दिक बधाई 

Comment by कल्पना रामानी on October 6, 2013 at 9:38pm

इतने कम शब्दों में बहुत गहरी बात कह देना ही लघुकथा की सफलता है। बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by Shubhranshu Pandey on October 6, 2013 at 4:40pm

आदरणीय रवि जी, एक कड़वी सच्चाई, जिससे सभी दो चार हो जाते हैं..

कार्य स्थल पर यौन उत्पीड़न. ये एक ऎसी समस्या है जिसपर खुल कर बहस हो रही है...कथा में इस विशय को उठाने के लिये बधाई..

सादर. 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 6, 2013 at 2:50pm

जिस कसावट के साथ इस लघुकथा लिखा गया है... वह एक उदाहरण सदृश है.

कथ्यसांद्रता नें बहुत प्रभावी तरह से शब्द चित्र उकेरा है..

इस लघुकथा पर हार्दिक बधाई आ० रवि प्रभाकर जी 

Comment by Ravi Prabhakar on October 5, 2013 at 2:39pm

मंच के सभी महानुभावों का लघुकथा की सराहना के लिए धन्यवाद।

Comment by Ravi Prabhakar on October 5, 2013 at 2:37pm

आदरणीय मीना पाठक जी,
आपने लघुकथा पसंद की आपका धन्यवाद। आप स्वयं उच्च कोटि की लेखिका है। आप जैसे ज्ञानी व गुणी लोगों की टिप्पणी वाकई में आॅक्सीजन का काम करती है। 

Comment by Ravi Prabhakar on October 5, 2013 at 2:34pm

प्रिय बहन महिमा,
आपको रचना पसंद आई, आपका धन्यवाद।

Comment by Ravi Prabhakar on October 5, 2013 at 2:32pm

बागी भाई जी!
आपकी टिप्पणी का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। आप स्वयं एक बहुत सफल लेखक है। देर से की गई आपकी टिप्पणी से थोड़ा डर सा गया था कि बागी भाई को शायद लघुकथा पसंद नहीं आई। आपकी टिप्पणी से अति उत्साहित हूं। सराहना के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

Comment by Ravi Prabhakar on October 5, 2013 at 2:29pm

आदरणीय गिरीराज जी व डी.पी. माथुर जी,
आप जैसे सहृदय महानुभावों की सराहना से नए जोश का संचार होता है। धन्यवाद ।

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