For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हमने घर की दीवारों में    

जीवन की इक आस सजायी

 

रत्ती-रत्ती सुबह बटोरी

टुकड़ा-टुकड़ा साँझ संजोई

इस चुभती तिमिर कौंध में

दीपों की बारात सजायी

 

तिनका-तिनका भाव बटोरे 

टूटे-फूटे सपन संजोये

साँसों की कठिन डगर पे

आशा ही दिन-रात सजायी  

 

भूख सहेजी, प्यास सहेजी 

सोती-जगती रात सहेजी 

यूँ चलते, गिरते-पड़ते 

कितनी टूटी बात सजायी

 

तेरे हाथों के स्पर्शों ने   

इन होठों की मुस्कानों ने  

मेरे इस सूने मन में

सहज सुनहरी प्रीत सजायी  

 

                  - बृजेश नीरज

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 791

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश नीरज on September 13, 2013 at 6:51pm

आदरणीय केवल जी, मेरी रचना को समय देने तथा मार्गदर्शन हेतु आपका हार्दिक आभार!

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 13, 2013 at 6:46pm

आ0 बृजेश भाई जी, भाई जी यह क्या है?

हमने घर की दीवारों में .......हमने या ..मैंने
जीवन की इक आस सजायी

रत्ती.रत्ती सुबह बटोरी
टुकड़ा.टुकड़ा साँझ संजोई.......प्रवाह बाध्य?
इस चुभती तिमिर कौंध में......गेयता बाध्य है!
दीपों की बरसात सजायी.......दीपों की अवलियां या कतारें या समूह होते हैं..आपने दीपों की बरसात ही कर दी। वाह.. वाह खूब कही।

तिनका.तिनका भाव बटोरे
टूटे.फूटे सपन संजोये......स्वप्न या सपने
साँसों की कठिन डगर पे
उम्मीदों की बारात सजायी..........मात्रा का भी निर्वहन नहीं हुआ।

भूख सहेजीए प्यास सहेजी
सोती.जगती रात सहेजी
यूँ चलतेए गिरते.पड़ते
कितनी टूटी बात सजायी

तेरे हाथों के स्पर्शों ने
इन होठों की मुस्कानों ने......मुस्कानों  ने या से
मेरे इस सूने मन में
सहज सुनहरी प्रीत सजायी
-------------------------------------------------------------------------सादर,

Comment by बृजेश नीरज on September 13, 2013 at 6:32pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on September 13, 2013 at 6:31pm

आदरणीय शिज्जू जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on September 13, 2013 at 6:31pm

आदरणीय अरुन भाई आपका हार्दिक आभार!

Comment by annapurna bajpai on September 13, 2013 at 6:22pm

बहुत ही सुंदर रचना पढ़ने वाला मंत्र मुग्ध सा पढ़ता चला जाता है। बार बार पढ़ें फिर भी कम ही है आपकी लेखनी का जादू कुछ ऐसा ही है । बहुत बधाई आपको आ0 बृजेश जी ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 13, 2013 at 4:43pm

वाह आदरणीय बृजेशजी प्रवाहमयी प्रस्तुति है पढ़ो तो यूँ लगता है पढ़ता ही रहूँ, दिली दाद कुबूल करें

Comment by अरुन 'अनन्त' on September 13, 2013 at 3:54pm

वाह वाह आदरणीय बृजेश भाई जी मुग्ध कर दिया आपने बहुत ही सुन्दर मनोहारी रचना है भाई जी भावपूर्ण प्रस्तुति के लिए दिल से बधाई स्वीकारें.

Comment by बृजेश नीरज on September 13, 2013 at 3:34pm

आदरणीय जितेन्द्र जी आपका बहुत आभार!

Comment by बृजेश नीरज on September 13, 2013 at 3:33pm

आदरणीय रविकर जी मार्गदर्शन हेतु आपका हार्दिक आभार!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
Monday
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
Friday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
May 13

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
May 13
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
May 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service