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लघुकथा - अनुष्ठान (शुभ्रा शर्मा 'शुभ ')

बहुत उपचार के बाद भी चित्रा की गोद सूनी थी |पूरा परिवार चिंतित रहता था |चित्रा यज्ञं हवन के लिए पति राजेश पर दवाब देती तो नोक-झोक हो जाती थी |राजेश को पूजा पाठ पर विश्वास नहीं था | काफी मेहनत के बाद चित्रा की माँ अपने भगवान् तुल्य गुरूजी मायाराम बाबू से मिली |गुरूजी चित्रा के कुंडली में संतान के घर में अनिष्टकारी ग्रह देख एक ग्रह शांति का ख़ास अनुष्ठान कराने के लिए उनके घर आने को राजी हो गए |चित्रा भी उत्साहित हो गुरूजी की आवभगत की सारी तैयारियाँ कर ली थी | गुरूजी और चित्रा को पूजा करते करते रात हो गयी, तभी चित्रा रोते हुए माँ से लिपट कर कहने लगी, 'मुझे माँ नहीं बनना .....

शुभ्रा शर्मा 'शुभ '

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by shubhra sharma on September 6, 2013 at 9:37am

 आदरणीय अभिनव    जी , कथा के मर्म तक पहुँच उत्साह्वार्धन  हेतु हार्दिक धन्यवाद 

Comment by shubhra sharma on September 6, 2013 at 9:35am

 आदरणीया  वंदना   जी , कथा को मान  हेतु हार्दिक धन्यवाद 

Comment by shubhra sharma on September 6, 2013 at 9:32am

आदरणीय जितेन्द्र  जी ,  टिपण्णी हेतु हार्दिक धन्यवाद

Comment by shubhra sharma on September 6, 2013 at 9:30am

आदरणीय बागी जी ,  टिपण्णी हेतु आपको हार्दिक धन्यवाद 

Comment by shubhra sharma on September 6, 2013 at 9:27am

आदरणीय राजेश कुमार झा जी  ,निराश और हताश लोग ही ढोंगी बाबाओं के जाल में ज्यादा फसते है , टिपण्णी हेतु आपको हार्दिक धन्यवाद 

Comment by shubhra sharma on September 4, 2013 at 11:43am

आदरणीय राजेश कुमारी जी , अपने विचारों  से उत्साहवर्धन हेतु धन्यवाद 

Comment by shubhra sharma on September 4, 2013 at 11:40am

आदरणीय अन्न्पूर्णा  जी , टिपण्णी हेतु धन्यवाद 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on September 3, 2013 at 7:58pm

इस सामयिक लघु कथा के माध्यम से पाखण्ड को उजागर करने केलिय बधाई 

Comment by Meena Pathak on September 3, 2013 at 6:49pm

सुन्दर, सामयिक लघुकथा .. हार्दिक बधाई

Comment by Shubhranshu Pandey on September 3, 2013 at 6:39pm

आदरणीया शुभ्रा जी, ठहरते, रुकने, सम्भलते आपने सभी कुछ कह दिया है. कथा एक पूर्व आभास के साथ समाप्त हो रही है. यहाँ एक बोल्ड स्टेप चित्रा और उसकी माँ को मिल के उठाना चाहिये था. 

सादर. 

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