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पीछे हट जाने का डर है।

घोर तिमिर है, 
कठिन डगर है, 
आगे का कुछ नहीं सूझता,
पीछे हट जाने का डर है।

मन में इच्छाएं बलशाली 
शोणित में भी वेग प्रबल है,
रोज लड़ रहा हूँ जीवनसे
टूट रहा अब क्यों संबल है

मैंने अपनी राह चुनी है 
दुर्गम, कठिन कंटकों वाली 
जो ऐसी मंजिल तक पहुंचे 
जो लगे मुझे कुछ गौरवशाली

धूल धूसरित रेगिस्तानी हवा के छोंकें 
देते धकेल , आगे बढ़ने से रोकें 
सूखा कंठ, प्राण हैं अटके 
कब पहुंचूंगा निकट भला पनघट के

आगे बढ़ना भी दुष्कर है 
मन में मेरे अगर मगर है 
आगे का कुछ नहीं सूझता,
पीछे हट जाने का डर है।

किन्तु गीता में लिखा हुआ है 
तू फल की चिंता मत करना 
अपना कर्म किये जा राही 
निर्णय तो मुझको है करना

सूरज भी निर्बाध गति से चलता है 
निश्चित ही ये घोर तिमिर छटना है 
और साथ ही छट जाएगी घोर निराशा 
लक्ष्य हांसिल करने की सीढ़ी है आशा

मन में आशा 
और अधरों की प्यास 
इतना निश्चित है 
ले जाएगी मुझे लक्ष्य के पास

घोर तिमिर है, 
कठिन डगर है, 
पीछे मुड़कर नहीं देखना 
पीछे हट जाने का डर है।

"मौलिक व अप्रकाशित"

शब्दकार :  Aditya Kumar 

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 27, 2013 at 1:12am

सुन्दर प्रयास !

शुभ-शुभ

Comment by Aditya Kumar on August 26, 2013 at 11:50am

आदरणीय Dr.Prachi Singh जी आपका हार्दिक धन्यवाद ! यहाँ वास्तव में बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है ! 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 24, 2013 at 1:51pm

आ० आदित्य कुमार जी 

बहुत सुन्दर कथ्य प्रस्तुत किया है...

मन में निश्चय करके एक मंजिल तय करना.. फिर राह में आने वाली रुकावटों से घबरा जाना और गीता का उपदेश याद रख कर्म मार्ग पर चलते जाना... घोर निराशा में , आशा की किरणों के प्रस्फुटित होने की आस रखना...

बहुत महसूस करके लिखी गयी मर्म स्पर्शी अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बधाई 

अंतर्गेयता व तुक मिलान सब खूबसूरत है.... प्रयासरत रहिये, सह रचनाकारों की अभिव्यक्तियों को भी तन्मयता से पढ़िए... काव्य के आवश्यक तत्व रचना में स्वतः ही समाहित होने लगेंगे 

शुभेच्छाएँ 

Comment by Aditya Kumar on August 23, 2013 at 6:30pm

आदरणीय अग्रज Sheel Kumar  जी उत्साहवर्धन हेतु आपका  सादर धन्यवाद्।  कृपया मार्गदर्शन देते रहिये मुझे आपका आभारी रहूँगा 

Comment by Aditya Kumar on August 23, 2013 at 6:27pm

आदरणीय  विजय मिश्र जी आपका सादर धन्यवाद् 

Comment by Aditya Kumar on August 23, 2013 at 6:26pm

आदरणीय  Vinita Shukla जी आपका सादर धन्यवाद् 

Comment by Vinita Shukla on August 23, 2013 at 1:46pm

निराशा में आगे बढने को प्रेरित करतीं, भावयुक्त पंक्तियाँ. बधाई आदित्य जी.

Comment by विजय मिश्र on August 23, 2013 at 12:56pm
सुंदर आशय के साथ रची गयी एक क्लिष्ट तार्किक रचना , बधाई आदित्यजी .
Comment by Sheel Kumar on August 22, 2013 at 6:59pm

जिस तरह से आप लिख रहें हैं , शीघ्र ही परिमार्जित हो कर और भी परिष्कृत होंगे , यह सनातन नियम है 

लिखते रहिये , बडों से स्नेह व मार्ग दर्शन लीजिये , आप मे क्षमता है ........
Comment by Aditya Kumar on August 22, 2013 at 5:39pm

आदरणीय  Kewal Prasad जी , आपका हार्दिक आभार , यही चाहूँगा के आप समय समय पर मेरे प्रयासों को अपने सुझावों से सार्थक दिशा देते रहेंगे।  परन्तु मेरे लिए त्रुटियों को स्पष्ठ रूप से जानना आवश्यक है तो आपका आभारी रहूँगा यदि आप त्रुटियों को स्पष्ठ कर दें तो।  

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