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अश्कों की बारिश में,
ऐसे हैं भींगे हम…..
जिंदगी पल पल अब,
हो रही है बे दम……
सांसों से भीख जैसे,

हैं माँग रहे हम……

क़िस्त-क़िस्त दे रहा,
है कर, हमपे रहम…
जब से जिंदगी से,
चले गए हो तुम…...
अब न कोई हमसफ़र,
रहा न कोई हमदम….
या ख़ुदा कर मदद,
इतना सा कर करम…
अश्कों की बारिश में………
….अभिषेक कुमार झा ''अभी''

"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment

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Comment by coontee mukerji on July 24, 2013 at 3:33pm

आदरणिय ,अगर भावों को और विस्तार मिलता तो और अच्छा होता.

Comment by annapurna bajpai on July 24, 2013 at 3:13pm

अत्यंत सुंदर भाव है अभि ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 24, 2013 at 12:33pm

प्रिय वियोग की पीड़ा को सुन्दर शब्द मिले हैं 

शुभकामनाएँ 

Comment by Ketan Parmar on July 24, 2013 at 11:20am

अभिषेक कुमार झा ''अभी''

saheb maafi chahunga agar ye meri gustakhi hai toh

magar rachna kuch adhuri lag rahi hai.

jaha interest padhne kaa shuru hua waha aapki rachna hi khatam ho gayi isse fir padh kar baat poori kare taki or mazaa aaye padhne wale ko

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