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ऐ प्रकृति तू धर शरीर

ऐ प्रकृति तू धर शरीर
ले जन्म किसी माँ की कोख से !!

.
जब तुझे लगेगी चोट
बहेगा लहू तेरे शरीर से
या बीच राह में कोई
दाग लगेगा आबरू पे कोई
जब जागेगा ये मानव कही
रक्षा को तेरी तभी

ऐ प्रकृति तू धर शरीर !!

.
वैसे तो कुछ दिनों का होगा जोश
मानव का मानव के लिए
मगर इस बहाने ऐ प्रकृति
तेरा ख्याल तो आयेगा
वरना ये शातिन प्राणी
अपने स्वार्थ के लिए
तुझको ही ये लूटता जायेगा
ऐ प्रकृति तू धर शरीर
ले जन्म किसी माँ की कोख से ......!!

शातिन = दुराचारी 


मौलिक एवं अप्रकाशित
सुमित नैथानी

Views: 629

Comment

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Comment by Parveen Malik on July 15, 2013 at 8:33pm
सुमित भाई बहुत सुन्दर ..... बधाई !
Comment by Sumit Naithani on July 12, 2013 at 4:44pm

साथ मे आपकी सुन्दर पंक्तिया ...उनके लिए धन्यवाद 

Comment by Sumit Naithani on July 12, 2013 at 4:38pm

लक्ष्मण जी प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया ....

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 12, 2013 at 4:35pm

प्रकृति देती है जन्म बनकर धरा 

उसकी ही गोद में उपवन हरा-भरा 

उसको न यूँ शातिर प्राणी से है कहना 

प्राणी अपनी आदत से खुद ही मरा |

आपकी विचार शील/सोच के लिए बधाई 

Comment by Sumit Naithani on July 12, 2013 at 1:27pm

Ravikar ji @ sukriya

Comment by Sumit Naithani on July 12, 2013 at 1:26pm

D P Mathur ji@ prtikriya ke liye shukriya

Comment by Sumit Naithani on July 12, 2013 at 1:26pm

neeraj ji shukriya

Comment by रविकर on July 12, 2013 at 11:44am

नहीं चुनौती को करे, यह कुदरत स्वीकार |
मानव को खुब समझती, इससे नहिं उद्धार ||

आभार आदरणीय-सुन्दर सोच-

Comment by D P Mathur on July 12, 2013 at 11:17am

सुमित जी इंसान प्रकृति से छेड़छाड़ करता ही रहेगा ,
क्योंकि उसे दोहन की आदत हो गई है !
अच्छा व्यंग्य !

Comment by Neeraj Nishchal on July 12, 2013 at 11:10am

bahut hi sundar rachna

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