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दोस्तों को दुश्मन बनाया है किसने ..
शमशान में लाशों को पहुँचाया है किसने..

किसने किसको, किसको है देखा ..
न देखा है हमने न, देखा है तुमने...

हुयी शाम और ये रात है आयी..
किसने ये तारों की महफ़िल सजाई ...

सोचते-सोचते में सो गया हूँ ..
रात की कालिमा में मैं खो गया हूँ..

किसने इस कालिमा को लालिमा बनाया ..
किसने मुझको फिर से जगाया..

किसने किसको, किसको है देखा ..
न देखा है हमने न, देखा है तुमने...

किसने, हमको और तुमको बनाया ....
बनाकर मिटाया और फिर से बनाया ...

किसने नफरत और द्वेष बनाया ...
किसने प्रेम का सन्देश सिखाया ..

किसने चमन को है मरघट बनाया ..
न जाना है तुमने, न जाना है मैंने..

किसने किसको, किसको है देखा ..
न देखा है हमने न, देखा है तुमने... ??????

"मौलिक व अप्रकाशित"

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 26, 2013 at 5:47pm

भाव प्रस्तुति के लिए बधाई,

शुभेच्छाएँ

Comment by aman kumar on June 26, 2013 at 5:22pm

किसने चमन को है मरघट बनाया .. 
न जाना है तुमने, न जाना है मैंने..

आप महान हो अमोद भाई , लगता है कभी पीलीभीत ही आना  होंगा आपसे मिलने ,

मज़ा आ गया !

Comment by Amod Kumar Srivastava on June 26, 2013 at 5:11pm

मान्यवर  बृजेश नीरज जी बहुत बहुत आभार ... .आपका .. सादर

Comment by Amod Kumar Srivastava on June 26, 2013 at 5:11pm

मान्यवर    वीनस केसरी जी बहुत बहुत आभार ... .आपका .. सादर

Comment by Amod Kumar Srivastava on June 26, 2013 at 5:10pm

मान्यवर   Jitendra Pastariya जी बहुत बहुत आभार ... .आपका .. सादर

Comment by बृजेश नीरज on June 12, 2013 at 10:13pm

आपके प्रयास पर आपको बधाई! 

Comment by वीनस केसरी on June 11, 2013 at 3:37pm

sundar prastuti ....

hardik badhai

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on June 11, 2013 at 3:30am
आदरणीय..अमोद जी, खूबसूरत रचना प्रस्तुत की आपने .."किसने, हमको और तुमको बनाया...बनाकर मिटाया और फिर से बनाया..किसने नफरत और द्वेष बनाया...किसने प्रेम का सन्देश सिखाया...किसने चमन को मरघट बनाया ...न जाना तुमने न जाना है मैने...!आदरणीय...हार्दिक शुभकामनाऐं

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