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!!! गजल !!!
वज्न-2122, 2122, 2122, 212


तुम जो आये जिन्दगी में, बात सादर हो गयी।
जिन्दगी की सारी सरिता, आज सागर हो गयी।।


आपसी मत भेद भूले, कामना सच हैं नये।
बात रातों की करे तो, चांदनी कर हो गयी।।


हुस्न के जल्वे दिखे है, शाम शबनम की खुशी।
हम सफर जो साथ रहता, आंख कातर हो गयी।।


बन्दगी अब बन्दगी है, रंग - रंगत एक से।
आज फिर राधा-किशन है, बात सुन्दर हो गयी।।


आपकी ही बांसुरी में, गोपियों की लालसा।
राम का दर्शन कराती, मुक्ति सुखकर हो गयी।।


हम नहीं तो क्या सही है, क्या गलत है रास्ता।
आप से ही पूंछता हूं, हाल कमतर हो गयी।।


नफरतों की सोच ‘सत्यम‘,आग को अब रोक दो।
हर कदम अब छांव देखो, धूप बदतर हो गयी।।


के0पी0सत्यम/मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 13, 2013 at 8:56pm

आ0 कुन्ती मैम जी, वास्तव में इस गजल के लिए मैं भाई वीनस जी तथा ओ0बी0ओ0 परिवार को श्रेय देना चाहूंगा, क्योकि यह सब यहीं से सीखा है। और इन्हीं को समर्पित भी है। गजल की सराहना एवं अपार स्नेह के लिए आपका तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 13, 2013 at 8:54pm

आ0  शालिनी जी,   गजल की सराहना एवं अपार स्नेह के लिए आपका तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 13, 2013 at 8:53pm

आ0  सीमा मैम जी, वास्तव में इस गजल के लिए मैं भाई वीनस जी तथा ओ0बी0ओ0 परिवार को श्रेय देना चाहूंगा, क्योकि यह सब यहीं से सीखा है। और इन्हीं को समर्पित भी है। गजल की सराहना एवं अपार स्नेह के लिए आपका तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 13, 2013 at 8:51pm

आ0 श्याम नारायण भाई जी,  गजल की सराहना एवं स्नेह के लिए आपका तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 13, 2013 at 8:49pm

आ0 कुशवाहा जी,  गजल की सराहना एवं अपार स्नेह के लिए आपका तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by Roshni Dhir on May 13, 2013 at 8:43pm

केवल जी बहुत सुंदर गज़ल 

बन्दगी अब बन्दगी है, रंग - रंगत एक से।
आज फिर राधा-किशन है, बात सुन्दर हो गयी।।

बधाई 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 13, 2013 at 8:41pm

आ0 जवाहर सिंह जी, गजल की सराहना एवं स्नेह के लिए आपका तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 13, 2013 at 8:39pm

आ0 शालिनी जी, गजल की सराहना के लिए आपका तहेदिल से हार्दिक आभार।  सादर,

Comment by ram shiromani pathak on May 13, 2013 at 8:38pm

वाह वाह वाह  क्या बात है आदरणीय  केवल भाई बहुत ही सुन्दर लिखा है आपने//हार्दिक बधाई 

Comment by shalini rastogi on May 13, 2013 at 8:15pm

बहुत खूब केवल जी ... सुन्दर गज़ल !

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