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घनाक्षरी प्रथम प्रयास

सीस झुके है सबके ,करते हुए वन्दना
लोग न अघाते माता, माता बोले जाते है!
जिस ओर देखो उस, ओर दिखती है भीड़,
मन में कामना लिए, ध्यान किये जाते है!!

पल भर अपने को ,सब भूल जाते यहाँ ,
पूजन में लीन सब, कष्ट भूल जाते है !
जान पड़ता हैं आज,डूबे सबहि भक्ति में,
छोड़कर काम धाम, देखो चले आते है !!

राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 14, 2013 at 9:57pm

सुन्दर प्रयास के लिए बधाई श्री राम शिरोमणि जी 

Comment by shalini kaushik on April 14, 2013 at 8:53pm

hame to seekhne ko hi mil raha hai .aabhar

Comment by ram shiromani pathak on April 14, 2013 at 2:05pm

हार्दिक आभार आदरणीय  अशोक सर !बस ऐसे ही स्नेह बनाए रखे...सादर 

Comment by ram shiromani pathak on April 14, 2013 at 2:04pm

हार्दिक आभार आदरणीया प्राची मैम!बस ऐसे ही स्नेह बनाए रखे...सादर 

Comment by Ashok Kumar Raktale on April 13, 2013 at 11:37pm

भाई राम शिरोमणि जी सादर, सुन्दर प्रयास हुआ है घनाक्षरी पर, यह वार्णिक छंद है, मैं कई बार लिख कर भी इसके प्रवाह को ठीक से नहीं पकड़ पा रहा हूँ. आप अन्य छन्दों में जिस तेजी से आगे बढ़ रहे हैं मुझे यकीन है आप कवित्त को भी अच्छे से रच सकेंगे. ओ बी ओ  पर भोजपुरी रचनाओं का एक उत्सव आयोजित हुआ था उसमे आदरणीय बागी जी द्वारा  गाये कवित्त  का ऑडियो  सुनकर आप इसके प्रवाह को साध सकते हैं. http://www.openbooksonline.com/group/bhojpuri_sahitya/forum/topics/...


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 13, 2013 at 10:55pm

प्रिय राम शिरोमणि जी 

नए नए छंदों पर आपका प्रयास बहुत सुखद लगता है... 

घनाक्षरी पर आपका  जगज्जननी को समर्पित यह प्रथम प्रयास मुझे बहुत अच्छा लगा.

यह ज़रूर है कि गेयता निर्बाध नहीं है... पर निरंतर प्रयास से आप इसे जल्दी ही साध लेंगे..

सद्प्रयास के लिए शुभकामनाएँ 

Comment by बृजेश नीरज on April 13, 2013 at 7:30pm

भाई मैं इस विधा के बारे में तो कुछ नहीं जानता, सो मेरे लिए तो यह विधा काला अक्षर भैंस बराबर।
हां, इस नवरात्रि पर माता का यह स्मरण दिल को भा गया।
जय मां दुर्गे!

Comment by ram shiromani pathak on April 12, 2013 at 10:00pm

आदरणीय संदीप भाई  जी ,!आपके अमूल्य सुझाव के लिए हार्दिक  आभार !!बेहतर लिखने का प्रयाश करूँगा 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on April 12, 2013 at 9:53pm

आदरणीय राम भाई बहुत ही सुन्दर प्रयास हुआ है 

सादर बधाई स्वीकारें 

तत प्रवाह के क्रम में आदरणीय विनय भाई से सहमत हूँ 

उसे सुधारने का कुछ प्रयास किया है 

सीस सबके झुके हैं ,करते हुए वन्दना 
लोग न अघाते माता, माता बोले जाते है
जिस ओर देखो उस, ओर दिखती है भीड़, 
मन में कामना लिए, ध्यान किये जाते है!!

पल में ही अपने को ,सब भूल जाते यहाँ ,
पूजन में लीन सभी , कष्ट भूल जाते है ! 
जान पड़ता हैं आज, हुए सभी भक्तिमय , 
छोड़कर काम धाम, देखो चले आते है !!

Comment by ram shiromani pathak on April 12, 2013 at 9:49pm

आदरणीय भाई केवल जी आपके अमूल्य सुझाव के लिए हार्दिक  आभार !!

कृपया ध्यान दे...

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