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चतुष्पदी ,चैापैया.(10, 8, 12 अन्त में दो गुरू)

जय पाप नाशनी जीवन दानी जन मानस हितकारी!
शंकर शीश जटा उलझी सुलझी जस महदेव विचारी!!
कॅापें दिश देवा भय सब भावा सुलोक विस्मयकारी!
श्री शंभु पुरारे नाथ हमारे धावत दीनन वारी!!1


रस रस कर धारा विष तन सारा अमृत चरनहि सुखारी!
तुम दीन दयाला चॅंद सो हाला देवन की महतारी!!
हे!सुरसरि माता दुख हर जाता आवत शरण तिहारी!
तुम जाति धर्म नहि अवगुण जानहि फल जनत बिन विचारी!!2


यह पदुम परागा तन मन रागा बन जाता अविकारी!
हे! मातु भवानी कहॅू जुबानी हम बालक मद कारी!!
हम करते कल्मष तन तट खर खस आप सदा सुविचारी!
हे! मॅा कल्यानी मत्सर जानी छमा करो सुरतारी!!3


हम सब जस पायें सदा लुटायें नहि करें दुःख-रारी!
हम भीष्म प्रतिज्ञा मुनि मन आज्ञा निर्मल गंग सॅंवारी!!
जय जय मॅा गंगा मन भा चंगा सकल ताप भय हारी!
सत्यम शिशु लीला आंचल गीला हॅस मुख मातु निहारी!!4
सत्यम/मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 21, 2013 at 9:15pm

आदरणीय श्री राजेश कुमार झा जी, श्री राम शिरोमएिा पाठक जी, श्री योगी सारस्वत जी एवं श्री बृजेश कुमार सिहं जी आप सभी लोगों का  बहुत-बहुत  धन्यवाद एवं आभार।

Comment by राजेश 'मृदु' on March 21, 2013 at 4:52pm

चवपैया छंद पर मैं पहली बार कोई प्रस्‍तुति पढ़ रहा हूं, रचना तो सुंदर है ही लय भी काफी अच्‍छी है, हार्दिक बधाई इस छंदमय प्रस्‍तुति पर, सादर

Comment by ram shiromani pathak on March 21, 2013 at 11:09am

आदरणीय बहुत सुन्दर! बधाई स्वीकारें!

Comment by Yogi Saraswat on March 21, 2013 at 10:56am

रस रस कर धारा विष तन सारा अमृत चरनहि सुखारी!
तुम दीन दयाला चॅंद सो हाला देवन की महतारी!!
हे!सुरसरि माता दुख हर जाता आवत शरण तिहारी!
तुम जाति धर्म नहि अवगुण जानहि फल जनत बिन विचारी!!2

आपने दोहावली में सुन्दर शब्दों का संचयन किया है

Comment by बृजेश नीरज on March 20, 2013 at 8:09pm

बहुत सुन्दर! बधाई स्वीकारें!

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 20, 2013 at 7:50pm

आदरणीय डा0 स्वर्ण जे0 ओंकार जी, आपको बहुत-बहुत  धन्यवाद एवं आभार!

Comment by Dr. Swaran J. Omcawr on March 20, 2013 at 1:01pm

बढ़िया  Kewal Prasad जी।

"शंकर शीश जटा उलझी सुलझी जस महदेव विचारी!!"
मैंने भी शाश्वत गंगा के अगले अंक में कुश ऐसी बातों का ज़िक्र कर रहा हूँ 
 आपने दोहावली में सुन्दर शब्दों का संचयन किया है 

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