For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जब भी मै गयी 

स्टोर में
या अटारी में
या खेत के गोदाम में

उठाने पुरानी यादें
जहाँ कोई नही जाता
मेरे तुम्हारे सिवा
एकदम से तुम आ गये
धीरे से ..और 
जोर से डरा दिया मुझे
धप्पा!!

           - 'वेदिका'

Views: 101

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by वेदिका on March 18, 2013 at 2:09pm

आदरणीय आशीष नैथानी 'सलिल' जी, आदरणीय विजय निकोर जी! आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी! आपका आभार करती हूँ की आपको भाव पसंद आये ....वरना मै तो बहुत हिचकिचा रही थी रचना को लेकर .....!
बहुत बहुत धन्यवाद! सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 16, 2013 at 11:14pm

वेदिकाजी, आपकी इस क्षणिका ने हृदय में चुपचाप पड़ी यादों को कुरेद कर मानों जगा दिया.  भाव-शब्दों की सरलता और कोमलता के रोमिल स्पर्श से शरीर बार-बार झंकृत हो रहा है. हार्दिक बधाई..

Comment by vijay nikore on March 16, 2013 at 10:40pm

वेदिका जी:

मुझको मार्मिक भाव प्रिय हैं ... कविता अच्छी लगी।

विजय निकोर

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on March 15, 2013 at 11:23pm

धप्पा.... सुन्दर क्षणिका !!!
बचपन के कुछ दिन ताजा हो गये|  :)

Comment by वेदिका on March 15, 2013 at 7:50pm

आभार बृजेश कुमार नीरज जी!

Comment by बृजेश नीरज on March 15, 2013 at 7:38pm

आपकी इस क्षणिका ने कई यादें ताजा कर दीं। बहुत सुन्दर!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Kalipad Prasad Mandal commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(बाअदब सब....)
"आदरणीया मनन जी , खुबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें "
14 minutes ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Ram Awadh VIshwakarma's blog post ग़ज़ल - यूँ ही गाल बजाते रहिये
"आदरणीय राम अवध विश्वकर्मा जी , सामयिक विषय पर बहुत खुबसूरत ग़ज़ल हुई है |बधाई आपको "
18 minutes ago
Kalipad Prasad Mandal commented on Samar kabeer's blog post 'ग़ालिब'की ज़मीन में एक ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर साहब ,आदाब बहुत गज़ब की ग़ज़ल  हुई है | है तो यह ग़ज़ल फिर भी मेरा विचार है तीसरा…"
23 minutes ago
दिनेश कुमार posted a blog post

तज़्मीन बर ग़ज़ल // "ज़िन्दगी में मज़ा नहीं बाक़ी" // दिनेश कुमार

एक कोशिश।तज़मीन बर ग़ज़ल जनाब फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ साहब।..फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन..इश्क़ का…See More
27 minutes ago
Kalipad Prasad Mandal commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल (कज़ा मेरी अगर जो हो)
"आदरणीय बासुदेव अग्रवाल जी  , बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है | इस नया प्रयोग के लिए हार्दिक बधाई "
34 minutes ago
Samar kabeer commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल (कज़ा मेरी अगर जो हो)
"जनाब बासुदेव अग्रवाल'नमन'जी आदाब,उम्दा ग़ज़ल हुई है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ ।"
43 minutes ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on Mohammed Arif's blog post लघुकथा--लूट
"वाहहहह मोहम्मद आरिफ जी करारा व्यंग। बहुत खूब।"
59 minutes ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on Samar kabeer's blog post 'ग़ालिब'की ज़मीन में एक ग़ज़ल
"वाहहह आ0 समर कबीर जी बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है। शेर दर शेर बधाई पेश है। दाद की हक़दार तो है ही गज़ल पर…"
1 hour ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल (कज़ा मेरी अगर जो हो)
"आ0 मोहम्मद आरिफ जी इसी मंच पर आ0 सलीम रजा जी और आ0 तस्दीक अहमद जी की ऐसी गज़लें पेश हो चुकी है। यहीं…"
1 hour ago
दिनेश कुमार commented on Samar kabeer's blog post 'ग़ालिब'की ज़मीन में एक ग़ज़ल
"बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है आ. समर साहब। हर शेर पढ़ने पर दिल से वाह निकली। मुबारकबाद सर।"
1 hour ago
Mohammed Arif commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post लम्बे रदीफ़ की ग़ज़ल (कज़ा मेरी अगर जो हो)
"आदरणीय वासुदेव जी आदाब, इन दिनों ओबीओ का मंच ख़ासतौर से ग़ज़लगो नया-नया प्रयोग 'लंबी रदीफ और सबसे…"
1 hour ago
Mohammed Arif commented on Mahendra Kumar's blog post मृत्यु : पूर्व और पश्चात्
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी आदाब, शाश्वत सच्चाई , सनातन सच्चाई मृत्यु के पूर्व और पश्चात की स्थिति को…"
1 hour ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service