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झूठे वचन हैं जिसके ,भाषण जिसका काम !
खाये सबकी गालियाँ ,नेता उसका नाम !!


नेता उसका नाम,जो लूटकर ही खाये !
बेचकर शर्म लाज,स्वयं को सही बताये !!


दिखता बंदरबाट ,तो जनता क्यूँ न रूठे !
नहीं रहा विश्वास ,सभी नेता है झूठे!!

राम शिरोमणि पाठक "दीपक"
(मौलिक/अप्रकाशित )

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Comment

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 2, 2013 at 3:45pm

इस प्रयास के लिए हार्दिक बधाई. विशेष भाई गणेश जी ने सुझाया ही है.

शुभेच्छाएँ

Comment by ram shiromani pathak on March 1, 2013 at 3:52pm

आदरणीय रविकर सर आशीर्वाद दिया करे.......हार्दिक आभार 

Comment by रविकर on March 1, 2013 at 3:36pm

बढ़िया है आदरणीय-

खोता है पंजाब में, बने यहाँ रँगदार |
नहीं ख़रीदे कभी कुछ, लेता सदा उधार |
लेता सदा उधार, द्वितीयक बने लुटेरा |
चरण तृतीय आय, हड़प लेता है डेरा |
निरा ढपोरी शंख, माँगने वाला रोता |
गर मौका पा जाय, नहीं फिर सत्ता खोता ||

Comment by ram shiromani pathak on March 1, 2013 at 2:08pm

आदरणीया प्राची मैम बस आपका स्नेह बना रहे,आपके सानिध्य में रहकर मै भी कुछ सीख सकूँ ,लिख सकूँ यही आशा करता हूँ !!
प्रणाम सहित हार्दिक आभार !!!!!!!!!!!!!

Comment by ram shiromani pathak on March 1, 2013 at 2:04pm

आदरणीय गणेश सर आपने अमूल्य सुझाव दिया मै इसके लिए हार्दिक आभारी हूँ ! यह मेरी पहली कोशिश थी ,थोड़ा इधर उधर होना स्वाभाविक था !
अपने तो इस कुंडलीया में जान दाल दी .............आशा करता हूँ आपका स्नेह मिलता रहेगा .......प्रणाम सहित हार्दिक आभार


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 1, 2013 at 12:41pm

वाह राम शिरोमणि पाठक जी, कुण्डलिया पर भी इतना सुन्दर प्रयास.

बहुत बहुत बधाई 

गेयता के लिए आदरणीय गणेश जी के द्वारा सुझाए सुन्दर परिवर्तन को गौर से देखें.. 

शुभेच्छाएं 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 1, 2013 at 12:28pm

शिरोमणि पाठक जी, आपकी कुण्डलिया को जरा इधर उधर किया है गेयता प्रदान करने के लिए ...जरा देखिये कुछ काम बनते दिख रहा क्या ?

झूठे हैं जिसके वचन, भाषण जिसका काम !
खाये सबकी गालियाँ, उसका नेता नाम !!

उसका नेता नाम, जो लूटे और खाये !
बेच शर्म औ लाज, सही को झूठ बताये !!

दिखता बंदरबाट, फिर क्यों न जनता रूठे !
रहा नही विश्वास, सभी नेता हैं झूठे!!

Comment by ram shiromani pathak on March 1, 2013 at 11:57am

आदरणीय सतवीर जी  हार्दिक आभार ...........

Comment by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on March 1, 2013 at 10:42am
इस छंद के माध्यम से आपने नेता की कलई खोलकर रख दी राम शिरोमणी दीपक जी।

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