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 सन्दर्भ :-रेल बजट 
-लक्ष्मण लडीवाला 
 
पवन एक्सप्रेस आ गई, लेकर के सौगात,
उम्मीदे हजार बढ़ी,  सुविधाओं की बात । 

 

सुनहरे स्वप्न  दिखाये, खूब जमायी थाप, 
जेब कटेगी रेल में,  जन जन को  संताप।
 
झुनझुना थमा हाथ में, मन मोहे सरकार,
देश पटरी पर  आवे,   फिर से दो सरकार। 
 
टिकट कटा यात्रा करे, रद्द करे नहि आप,
रद्द करे सचेत रहे , महँगाई   का  श्राप । 
 
टिकट संग पर्ची मिले, वैष्णो देवी जाय ,
टिकट कटा तीरथ करे,मन में भाव सजाय।
 
-लक्ष्मण प्रसाद लडीवाला  

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Comment

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Comment by Dr.Ajay Khare on March 1, 2013 at 11:06am

bajat samichha sunder sabdon ke saath badhai adarniy ladiwala ji

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on March 1, 2013 at 10:08am

दोहे पसंद करने के लिय हार्दिक आभार स्वकरे श्री राम शिरोमणि पाठक जी

Comment by ram shiromani pathak on February 28, 2013 at 8:57pm
टिकट संग पर्ची मिले, वैष्णो देवी जाय ,
टिकट कटा तीरथ करे,मन में भाव सजाय।
आनंद आ गया सर ये पंक्तिया पड़कर .........हार्दिक बधाई 
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 28, 2013 at 7:13pm

आज पहली बार आपकी रचना भी पढ़ी और आपने दोहे रुचकर बता मेरा होंसला बढाया,

आपका ओबॆओ पर स्वागत और हार्दिक बधाई श्री सतवीर वर्मा बिरकाली जी
Comment by pawan amba on February 28, 2013 at 6:29pm

टिकट कटा तीरथ करे,मन में भाव सजाय।..bahut khub sir...

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 28, 2013 at 6:01pm

दोहे पसंद करने के लिए हार्दिक आभार श्री राज बुंदेलीजी

Comment by सतवीर वर्मा 'बिरकाळी' on February 28, 2013 at 4:47pm
मन मोहे सरकार...
वाह क्या बात है! मनमोहनी सरकार के बजट पर अच्छा व्यंग्य किया है। धन्यवाद
Comment by कवि - राज बुन्दॆली on February 28, 2013 at 2:55pm

वाह क्या बात है बधाई आपको,,,,,,,,,,,,,,

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