For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सुना था ........


सुना था..दिल से करो याद जिसे,उसको हिचकियाँ आती है
यही सोच रोज हाल पूछने ,उसके घर चला जाता हूँ मै.....

सुना था..टूटे दिल से लिखी ग़ज़लों में बहुत जान होती है
शायर ही बनू,इसी ख्याल से सबसे इश्क लडाता हूँ मै....

सुना था..चने खाने से शरीर में घोड़े जैसी ताकत आती है
ताकत का तो पता नहीं,थक कर खड़े खड़े सो जाता हूँ मै ...

सुना था..गम बाँट देने से दिलोदिमाग स्वस्थ रहते है
कमजोर दिल इंसां हूँ, मारे खौफ के सब बाँट देता हूँ मै ...

सुना था..खुशियाँ मिल बाँट कर मनाओ तो दुगनी मिलती है
लालची दिल है मेरा,जरा भी मिलती है तो लुटा देता हूँ मै ...

सुना था..बादाम खाने से याद दाश्त तेज होती है
खाता तो रोज हूँ,मगर उधार वापस करना भूल जाता हूँ मै..

सुना था..अपना मरे तो स्वर्गवासी,पराये को कोई मर गया कहते हैं लोग
इसी स्वर्ग के लालच में,सबको अपना समझता हूँ मै ....

सुना था.. लौटती बारात की भी इक समय इज्ज़त कम हो जाती है
बहुत अहंकारी हूँ मै, किसी की भी बारात में नहीं जाता हूँ मै.....

सुना था...खुदा जब भी देता है छप्पर फाड़ कर देता है
टूटने में समय ना लगे, बिना छतों के मकान में रहता हूँ मै ...

जब से सुना है..की सुनी सुनाई सब बाते सच नहीं होती
यकीन आया,उतना समझदार नहीं ,जितना खुद को समझता हूँ मै ...पवन अम्बा

Views: 746

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by pawan amba on February 26, 2013 at 8:57pm

bahut bahut dhanywaad ..Vindeshwari Prasad Tripathi ji...Rajesh kumar Jha sahab...Harvindar Labana ji...Payal Pasha ji

Comment by Harvinder Singh Labana on February 26, 2013 at 3:14pm
Wah... Mjaaa Aa gya Ustaad ji Behad hi La-jawaab.. Zindagi ko Itne Baariki SE dekhna... Maan gye ... .Zindaabaad.
Comment by Harvinder Singh Labana on February 26, 2013 at 3:12pm
Wah... Mjaaa Aa gya Ustaad ji Behad hi La-jawaab.. Zindagi ko Itne Baariki SE dekhna... Maan gye ... .Zindaabaad.
Comment by राजेश 'मृदु' on February 26, 2013 at 11:09am

बहुत सुंदर रचना हरेक सुने को यूं बुनना इतना आसान नहीं, सादर

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on February 26, 2013 at 8:55am
सृजनशीलता को मार देना आत्मा का हनन है,सर लेकिन आपने दुबारा लिखना शुरु किया समझिये पुनर्जन्म हुआ।दुबारा लिखने पर बधाई
Comment by pawan amba on February 26, 2013 at 8:39am

आप आडमिन और विशाल चर्चित भाई को दिल से धन्यवाद ..जो मुझे आपने अपने इस ग्रुप मे जगह दी.
मेने लिखना छोड़ दिया था.लेकिन अब कोशिश कर रहा हूँ दुबारा लिखने की ..और उस कोशिश का ये पहला प्रयास है. और संदीप कुमार पटेलजी,वन्दना तिवारी जी,दा प्राची सिंह जी,किशन कुमार जी,विंधेयशवरी प्रसाद त्रिपाठी जी..लक्ष्मण प्रसाद जी,,,आप सब का दिल के हर कोने से धन्यवाद...आप सब के कोमेंट्स से दिल मे फिर से नयी शुरुआत करने की हिम्मत मिली है ...बहुत बहुत धन्यवाद इस ग्रुप को और इस ग्रुप के सभी सदस्यों को......

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 25, 2013 at 8:19pm

वाह वाह वाह बहुत ही सुन्दर सुना और गुना बधाई हो आदरणीय

Comment by Vindu Babu on February 25, 2013 at 5:52pm
सही कहा आपने आदरणीया प्राची जी, आदरेय अम्बा महोदय ऊपर की पंक्तियों में तो अपना पांडित्य सुस्पष्ट कर रहे हैं और अंत मे...-''उतना समझदार नही हूं मै''
बहुत सुन्दर,
बधाई आपको!

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 25, 2013 at 3:30pm

जब से सुना है..की सुनी सुनाई सब बाते सच नहीं होती 
यकीन आया,उतना समझदार नहीं ,जितना खुद को समझता हूँ मै..

वाह अंत में बाजी ही पलट दी पूरी रचना की....... बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति , हार्दिक बधाई 

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on February 25, 2013 at 11:43am
वाह क्या कमाल लिखा है,आदरणीय आपने।
जब से सुना है सुनी सुनाई बातें सच नहीं होती..................
यह पंक्ति तो गजब की बन पड़ी है बधाई पवन जी!।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"हाड़-मॉंस स्ट्रेट (लघुकथा) : "नेता जी ये क्या हमें बदबूदार सॅंकरी गलियों वाली बस्ती के दौरे…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)
"सादर नमस्कार आदरणीय मंच। इंतज़ार है साथियों की सार्थक रचनाओं का, सहभागिता का। हम भी हैं कोशिश में।"
yesterday
Admin posted a discussion

"ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-133 (विषय मुक्त)

आदरणीय साथियो,सादर नमन।."ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" में आप सभी का हार्दिक स्वागत है।प्रस्तुत…See More
Tuesday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"इल्म गिरवी है अभी अपनी जहालत के लिए ढूँढ लो क़ौम नयी अब तो बग़ावत के लिए अब अगर नाक कटानी ही है हज़रत…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। तरही मिसरे पर सुंदर गजल हुई है। गिरह भी खूब लगाई है। हार्दिक बधाई।"
Sunday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"2122, 1122, 1122, 112/22 सर झुका देते हैं हम उसकी इबादत के लिए एक दिल चाहिए हमको तो मुहब्बत के…"
Apr 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सादर अभिवादन।"
Apr 25
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
Apr 25
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
Apr 25
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Apr 21
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Apr 20
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Apr 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service