For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हम ढोते हैं अपनी विरासत को

हम ढोते हैं अपनी विरासत को
सभ्यता को
संस्कृति को
शाश्वत दर्शन को
बिना जाने
बिना समझे 
जीवन में उतारे बिना
हम पूजते हैं
अपने मूल्यों को
बिना समझे
बिना जाने
भटकते हैं
रौशनी के काफिले
हमें गर्व है
अपनी थाती पर
वेदों पर
पुराणों पर
मोहनजोदड़ो, हड़प्पा
के अवशेषों पर 

कटकर
अपनी जड़ों से-

कैसा

माटी का गुणगान ?
अध्यात्म की वृहद चर्चाओं में
कथित 'बाबाओं' की सभाओं में
खेली- खाई 'नैतिकता'
के छलावों में 
हम ढोते  
हैं आत्मा का बोझ 
 यह  कैसा
राष्ट्रीय चरित्र?
कि हम ढोते हैं ...
महज ढोते ही हैं -
अपनी विरासत को !!!


Views: 774

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on February 18, 2013 at 7:51pm

यह विडंबना ही है कि पृथ्वी पर किसी सभ्यता द्वारा संकलित अति उच्च अवधारणा की यह परिणति है जहाँ उक्त अवधारणा की शुद्ध-सटीक व्याख्या तक जनमानस के लिए सहज उपलब्ध नहीं है. और, जो सहज उपलब्ध है वह लौकिक विसंगतियाँ हैं जो सामान्य जन के मन में अवधारणाओं के प्रति जुगुप्सा का ही कारण बनती हैं.

कवयित्री ने पौरणिकता से आगे मानवीय इतिहास को संग लिया है. इस क्रम में हुए प्रश्न कटाक्ष की तरह सामने आते हैं.

आजकी जुगुप्साकारी विसंगतियों से सामान्य जनमानस कितना उद्वेलित और भ्रमित है, यह कविता मुखर रूप से सामने लाती है.

आगे, यह कवयित्री का ही दायित्व है कि सभ्यता की उच्च अवधारणाओं के सकारात्मक पहलू से भी जनमानस को विदित कराये.

शुभ-शुभ

Comment by Vinita Shukla on February 18, 2013 at 7:44pm

हमारी मूल परम्पराएँ तर्क, विज्ञान और अध्यात्म की कसौटियों पर खरी उतरती थीं और प्रासंगिक भी थी. समय के साथ उनमें से कइयों का स्वरुप विकृत हो गया है. प्रशंसा के लिए धन्यवाद आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद जी.

Comment by Vinita Shukla on February 18, 2013 at 7:39pm

सराहना के लिए आभार राम शिरोमणि जी.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on February 18, 2013 at 5:49pm
विरासत को ढोते रहना एक मज़बूरी भी है, और कुछ परंपरा, अन्धविश्वास, पर इसके साथ ही कुछ भावनाए भी जुडी होती है, जिसके कारण उसको न निभाने पर मन आहत होता है, बुजुर्गों को ठेस पहुँचती है, ऐसे में 'ढ़ोना। एक बेबसी अथवा मज़बूरी का कारण बन जाता है । सुन्दर भावो के लिए बधाई ।
Comment by ram shiromani pathak on February 18, 2013 at 5:34pm

आदरणीया vinita shukla  जी ! अच्छे विचारो के साथ भाव भी उत्तम  है ..........

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
Monday
Sushil posted blog posts
Monday
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Monday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service