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दानव का किरदार ले गए

जीने के आसार ले गए,

जीवन का आधार ले गए,

भूखों की पतवार ले गए,

लूटपाट घरबार ले गए,

छीनछान व्यापार ले गए,

दौलत देश के पार ले गए,

खुशियों के बाज़ार ले गए,

औषधि और उपचार ले गए,

सारा आदर सत्कार ले गए,

प्रेम भाव त्यौहार ले गए,

पेट्रोल बढ़ाया कार ले गए,

गाड़ी मेरी मार ले गए,

खुद्दारी खुद्दार ले गए,

दानव का किरदार ले गए.

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Comment by अरुन 'अनन्त' on January 10, 2013 at 4:55pm

आभार आदरणीय कुशवाहा सर

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on January 10, 2013 at 4:39pm

रचना पढ़ी है सुन्दर 

मेरा प्यार ले गए 

पैसा था जेब अंदर 

सामान  उधार ले गए 

बधाई 

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 5, 2013 at 11:09am

आदरणीय अशोक सर नमस्कार, आपने शानदार अंदाज में तुक लगाया है, हौंसला बढ़ गया हार्दिक आभार.

Comment by Ashok Kumar Raktale on January 5, 2013 at 8:21am

पेट्रोल बढ़ाया कार ले गए,

गाड़ी मेरी मार ले गए..............वाह! सुन्दर व्यंग.

हार्दिक बधाई स्वीकारें भाई अरुण जी.

एक तुक मेरी भी,,,,,

नकद माँगा उधार ले गये,

एक देकर चार ले गये,

बरसों का था प्यार ले गये,

फिर तो वो हरबार ले गये.

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 4, 2013 at 11:21am

आभार मित्रवर अमि तेष

Comment by अमि तेष on January 4, 2013 at 10:32am

badiya ..............

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 3, 2013 at 6:04pm

आदरणीय लड़ीवाल सर आपको रचना पसंद आई मेरा लेखन कार्य सफल हुआ, आभार.

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 3, 2013 at 6:03pm

धन्यवाद आदरणीय निकोर सर

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 3, 2013 at 6:03pm

आदरणीया सुमन जी आपको रचना पसंद आई तहे दिल से आभार.

Comment by अरुन 'अनन्त' on January 3, 2013 at 6:01pm

मित्रवर संदीप जी आभार आपको शब्दों के संकलन अच्छा लगा.

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