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दूर पहाड़ों से आया

मैं दूर पहाड़ों से आया

मैं दूर पहाड़ों से आया
जहाँ सर्द हवाएं बहती हैं
है व्यास पार्वती का संगम
जहाँ यादें मेरी बसती हैं
मेरे अपनें सभी वहीँ हैं
लेकिन मैं हूँ सबसे दूर
यह था किस्मत का लिखा
नहीं किसी का कसूर
ना जानें कब जा पाऊंगा
बापिस उन खूबसूरत फिजाओं में
कोई याद तो करता होगा
मुझको मेरे गाँव में
'दीपक शर्मा' था उस वक़्त मैं
अब हूं 'दीपक कुल्लुवी'
शक्ल-ओ-सूरत बदली,तखल्लुस बदला
लेकिन सीरत ना बदली
लेकिन सीरत ना ----

दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'
०९१३६२११४८६
२७-१०-10

Views: 340

Comment

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Comment by Deepak Sharma Kuluvi on October 28, 2010 at 10:06am
bahut khoob rana ji
pahadon ki kashish hai hi aisi
kuluvi
Comment by vikas rana janumanu 'fikr' on October 27, 2010 at 8:32pm
deepak ji ..

bahut khaas lagi,

mujhe bhi woh pahaad yaad aa gaye

aur ek sher, jo school time mai likha tha

jisse woh mandir woh pahaad na dikhe
khola nahi karte us khidki ko hum

jai-himachal :)
Comment by Deepak Sharma Kuluvi on October 27, 2010 at 4:54pm
DHANYABAAD SIR

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