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यह उनका अंदाज़ है

पहले प्यार सिखाते है
फिर दूर कही चले जाते है
ये उनका अंदाज़ है
यादों की भूलभुलैय्या में
सपनो को उलझाते है
चाहत की इस छैय्या में
नफरत की आग बरसाते है
ये उनका अंदाज़ है
आवारा भौरों की तरह
घूम घूम के आते है
मासूम कलियों के संग
चुपके से रस चुराते है
ये उनका अंदाज़ है
साथ रहने की कसमे खाते
आंसू बनकर रुलाते है
चाहे जितना रोको उन्हें
पत्थर दिल हो जाते है
ये उनका अंदाज़ है
देख न पाते प्यार को रोते
खुद सागर में मिट जाते है
प्यार की मंजिल छोड़ में एक दिन
पक्षी बन उड़ जाते है
ये उनका अंदाज़ है

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Comment by Sanjay Kumar Singh on May 5, 2010 at 9:06am
waah kya andaj hai, bahut hi achi rachna, aleem jee ka likha pahley bhi padha hai, yey bhi rachna pahley ki tarah hi khubsurat hai,

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 4, 2010 at 6:48am
अलीम जी, पहले की तरह यह गजल भी अच्छी है , इस रचना मे आपका अंदाज भी काबिलेतारीफ है,
Comment by Admin on May 3, 2010 at 1:15pm
साथ रहने की कसमे खाते
आंसू बनकर रुलाते है
चाहे जितना रोको उन्हें
पत्थर दिल हो जाते है
ये उनका अंदाज़ है,


बहुत बढ़िया अलीम जी , पहले की तरह फिर हमलोगों के सामने एक बेहतरीन रचना है, बहुत बहुत धन्यवाद है आपको ,

कुछ होते ही ऐसे है,
जो प्यार की दुनिया को,
बदनाम कर जाते है,
हम तो दुश्मन पर भी,
प्यार लुटाते है,
ये हमारा अंदाज है,
Comment by aleem azmi on May 3, 2010 at 12:54pm
sawaagat hai aap sabhi ke comments ka

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