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दस रंग भरे
दस रूप धरे
दशहरा हरा कर दे जग को.

दस आशाएं
दस उम्मीदें
दस आकांक्षाएं पूरी हों.

दस आँचल हों
दस गोद भरें
दस बूटे बेल सजे संग संग.

दस द्वेष जलें
दस ईर्ष्याएँ
दस तर्क वितर्क हों धूमिल भी.

दस अलंकार
दस विद्याएँ
दस सिद्धि मिलें दस दीप जलें.

दस ओर हमारा यश गूंजे
दस पदकों की खन-खन भी हो
दस पद अंतर की ओर चलें
दस परिमार्जित हों इच्छाएं .

दस मित्र बने
दस बातें हों
दस रचनाएं आकार धरें .

दस प्रण कर लें
दस वचन भी दें
दस वादे पूरे कर लें हम .

दस अंतर का रावण वध हो
दस कुम्भकर्ण कर दें जागृत
दस माताएं आयें वर दें
दशहरा हरा कर दे जग को
दशहरा भरा कर दे जग को .

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Comment

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Comment by Abhinav Arun on October 18, 2010 at 3:54pm
आचार्य सलिल जी,श्री प्रीतम जी और प्रिय बागी जी आप सबको रचना पसंद आयी .आभार.!!. प्रशंसा हौसला और ऊर्जा देती है. ओ.बी. ओ. ने मुझमे भी नई तरंग का संचार किया है .अपेक्षाओं पर खरा उतरूं ये प्रयास रहेगा.पुनः विनम्र अभिवादन .!!.
Comment by sanjiv verma 'salil' on October 18, 2010 at 9:57am
abhinav ke abhinav prayas kee das dish faile keerti naval.
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on October 17, 2010 at 9:10pm
ek baat main likhna bhul gaya ki is rachna ke liye "preetam tiwary Salutes you"
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on October 17, 2010 at 9:10pm
दस यश युक्त हो ओ बी ओ
दस कोटि सदस्य आयें गायें
दस हज़ार सुंदर रचनाएँ .

दस सौ वर्षों का साथ साथ
दस दस देशों में विस्तृत हों
दस वर्णन हों दस गुंजन हों
दस बिम्बों के नित दर्शन हों.

waah arun bhaiya waah....bahut khub rachna hai aapki ye to....OBO ke liye jo ye aapne prarthana ki hai iske liye bahut bahut dhanybaad aur shubhkamnaye....

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 17, 2010 at 8:40pm
दस यश युक्त हो ओ बी ओ
दस कोटि सदस्य आयें गायें
दस हज़ार सुंदर रचनाएँ .

दस सौ वर्षों का साथ साथ
दस दस देशों में विस्तृत हों
दस वर्णन हों दस गुंजन हों
दस बिम्बों के नित दर्शन हों.
वाह वाह अरुण भाई, दशहरे पर बहुत ही बढ़िया सौगात आपने दिया है, माता रानी आप की कलम को ताकत दे |
दस मित्र बने
दस बातें हों
दस रचनाएं आकार धरें .

दस प्रण कर लें
दस वचन भी दें
दस वादे पूरे कर लें हम .
बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति, बहुत बहुत बधाई आपको |
Comment by Abhinav Arun on October 17, 2010 at 9:26am
दस यश युक्त हो ओ बी ओ
दस कोटि सदस्य आयें गायें
दस हज़ार सुंदर रचनाएँ .

दस सौ वर्षों का साथ साथ
दस दस देशों में विस्तृत हों
दस वर्णन हों दस गुंजन हों
दस बिम्बों के नित दर्शन हों.

दशहरा सृजन के आँगन में
दस शब्द सहस्त्रों के काबिल
दस तीर चलें दस अस्त्र शस्त्र
दस सुंदर सुंदर भाव जगें.
दशहरा हरा कर दे जग को
दशहरा भरा कर दे जग को .

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