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रिमझिम बरस जाती हैं बूंदे
जब याद तुम्हारी आती है ।
बिन मौसम ही मेरे घर में
वो बरसात ले आती है ।
जब पड़ी मेह की बूंदे
मुस्कुराते उन फूलों पर
हर्षित फूलों पर वो बूंदे
तेरा चेहरा दिखाती है ।
नाता तो गहरा है
इन बूंदो का तुझसे
चाहे तेरी याद हो या
ये बरसात हो मुझे तो 
दोनों भिगो जाती हैं ।

- दीप्ति शर्मा

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Comment

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Comment by deepti sharma on July 9, 2012 at 1:07am

आदरणीय  आशीष जी शुक्रिया आपका बहुत बहुत आभार|

Comment by आशीष यादव on July 9, 2012 at 1:05am

सुन्दर भाव, और खासतौर पर ये पंक्तियाँ बहुत अच्छी लगी

नाता तो गहरा है 
इन बूंदो का तुझसे 
चाहे तेरी याद हो या 
ये बरसात हो मुझे तो  
दोनों भिगो जाती हैं । 

सुन्दर भावों पर बधाई स्वीकार कारिये

Comment by deepti sharma on July 9, 2012 at 1:03am

आदरणीय  प्रदीप जी  बहुत बहुत शुक्रिया आपको कविता पसंद आई ।

Comment by deepti sharma on July 9, 2012 at 12:50am

आदरणीय  हरीश जी बहुत बहुत शुक्रिया आपको कविता पसंद आई ।

Comment by Harish Bhatt on July 9, 2012 at 12:42am
Wah kya baat hai. Bahut accha
Comment by deepti sharma on July 9, 2012 at 12:14am

आदरणीय अरुण जी   आपका बहुत आभार अपना आशीष यूँही बनायें रखिये शुक्रिया|


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on July 9, 2012 at 12:10am

बिन मौसम ही मेरे घर में
वो बरसात ले आती है ।

नाता तो गहरा है
इन बूंदो का तुझसे
चाहे तेरी याद हो या
ये बरसात हो मुझे तो 
दोनों भिगो जाती हैं ।

मौसम और विरह में सुंदर साम्य स्थापित हुआ है. कोमल भावना की बूँदें पढने वाले के मन को भिगोने  में सफल हुई हैं. हर्ष भी विरह की बदली से झाँक रहा है.

जब पड़ी मेह की बूंदे
मुस्कुराते उन फूलों पर
हर्षित फूलों पर वो बूंदे
तेरा चेहरा दिखाती है ।

बधाई हो...........

Comment by deepti sharma on July 9, 2012 at 12:09am

आदरणीय उमाशंकर जी  आपका बहुत आभार अपना आशीष यूँही बनायें रखिये शुक्रिया|

Comment by UMASHANKER MISHRA on July 9, 2012 at 12:05am

बिन मौसम ही मेरे घर में
वो बरसात ले आती है ।....यह लाईन बहुत मार्मिक है दर्द भरी है

हर्षित फूलों पर वो बूंदे
तेरा चेहरा दिखाती है ।.....सुन्दर चित्रण प्रियतम के लिए यही प्यार है

चाहे तेरी याद हो या
ये बरसात हो मुझे तो 
दोनों भिगो जाती हैं । गहरा दर्द समटे हुवे है

हार्दिक बधाई दीप्ती जी आपकी खूबसूरत कल्पना पर

Comment by deepti sharma on July 8, 2012 at 11:50pm

आदरणीय सुरेन्द्र जी,

आपका बहुत आभार अपना आशीष यूँही बनायें रखिये शुक्रिया

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