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निर्मल मन मैला बदन , नन्हे नन्हे हाथ 
रोटी का कैसे जतन,समझ ना पाए बात (1) 

तरसे एक -एक कौर को ,भूखे कई हजार 
गोदामों में सड़ रहे, गेहूं के आबार (2) 

शून्य में देखते नयन , पूछ रहे है बात 
प्रजा तंत्र के नाम पर,क्यूँ करते हो घात (3) 

सीना क्यूँ फटता नहीं, भूखे को बिसराय 
हलधर का अपमान कर,धान्य, जल में बहाय (4) 

शासन की सौगात हो, या किस्मत की हार 
निर्धन को तो झेलनी, ये जीवन की मार (5) 

रंक का चूल्हा न जले, ना लकड़ी ना तेल 
मंत्रियों तक दौड रही ,सिलेंडरों की रेल (6) 

दिन हैं भ्रष्टाचार के,सत्य रहा है काँप 
मंहगाई की बीन   पे, नाच रहे हैं साँप  (7) 

बिगड़ी सूरत देश की ,किस के जल से धोय 
गंगा भी मैली करी,  बचा उपाय न कोय (8)

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 24, 2012 at 10:29am

संवेदना, भाव और कहन की दृष्टि से अति समृद्ध छंद प्रयास पर साधुवाद.

आदरणीया, छंद-विधा सम्बन्धी तथ्यों की जानकारी पर भी आप यथोचित समय दें तो आपकी रचनाएँ प्रविष्टि मात्र की संज्ञा न रह जायँ.  उच्च कहन से समृद्ध रचनाएँ हर कसौटी और मानकों पर खरी उतरेंगीं. उसपर से प्रस्तुत प्रविष्टि दोहा छंद के सन्निकट है जो ओबिओ का अत्यंत दुलारा छंद है.

सादर

Comment by Bhawesh Rajpal on June 24, 2012 at 9:38am
क्या खूब कटाक्ष किया है आपके दोहों ने  ! ये राजनीतिज्ञों के मुंह पर करारे तमाचे हैं , आज़ादी को ६५ वर्ष हो चुके हैं , अब तक हमारा विकास अधूरा है , हमारे देश में अगर एक भी व्यक्ति को भूखा रहना पड़े तो  ये असफलता है हमारे कर्णधारों की , उन्हें खुद का पेट , स्विस बैंक भरने से ही फुर्सत नहीं है , जनता के सामने , मीडिया में एक -दूसरे पर कुत्तों की तरह भोंकते हैं ,  परदे के पीछे  गले मिल कर पार्टी करते हैं ,  अन्ना जी और उनकी टीम जब सत्य उजागर कर जनता को जागरूक करने का काम कर रही है , तो सब मिल कर उनके दोष ढूँढने की कोशिश कर रहे है, ताकि  उनकी छवि जनता में खराब हो और उन्हें जन-समर्थन  न मिले ! लेकिन हमें आशा है  उनका आन्दोलन अवश्य सफल होगा , और भ्रष्टाचारियों का काला चेहरा  एक दिन जनता देखेगी  ! 
  आपको बहुत-बहुत बधाई  आदरणीय राजेश कुमारी जी  !

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 23, 2012 at 6:41pm

hahaha nahi lungi pradeep ji main bhrashtachar virodhi hoon.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 23, 2012 at 5:07pm

वाह जी वाह गुरु मन्त्र नहीं देंगी,

सिलेडर पर ब्लैक के पैसे लेंगी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 23, 2012 at 4:49pm

हाहाहा प्रदीप कुमार कुशवाह जी भेज  रही हूँ ...एनी वे हार्दिक शुक्रिया दोहे आपको पसंद आये 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 23, 2012 at 4:41pm

आदरणीय राजेश कुमारी जी , सादर 

वास्तविक चित्रण करारा  व्यंग 

युगलबंदी देख हम हो गए दंग

हम हो गए दंग कैसे सब लिखती हैं 

कथा, कविता हो गजल सब जंचती हैं

थोडा सा गुरु मन्त्र  हमें भी पिलवा दो

घर में नहीं गैस  १ सिलेंडर दिलवा दो 

बधाई  

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