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बेशक नफरतों को दिल में पालिए

 

बेशक नफरतों को दिल में पालिए 

मगर छाँव औरों पर मत डालिए 
 
रिश्तों की ये अजमाइश रहने दे 
इन्हें दौलत के तराजू में न तौलिये 
 
आपसी रंजिश का हाल यही होगा 
फायदा उठा लेंगे वही बिचौलिए 
 
लकीरों पे ऐतवार इतना अच्छा नहीं 
कुछ कर खुदा को भी हैरत में डालिए 
 
 दूसरों के घरों में झाँकने वालों 
पहले अपना ही दामन संभालिये
 
इतनी सिद्दत से जी रहे है क्यों लोग 
एक नज़र उन फकीरों पर डालिए 
 
अदालतें थक गई है इन्साफ कर के 
मुमकिन हो तो खुद को बदल डालिए 
 
साहिल पर खड़े होकर चिल्लाते है क्यों 
हौसला हो तो नौका भवर से निकालिए 
 
तुम सियासती हो ऐतराज नहीं हमको कोई 
मगर उन गरीबों को उनका  हक तो दिलाइये 
 
हमें बताओ की कौन यहाँ मुंसिफ है 'यश' 
जानना हो तो तो जहन में निगाह डालिए .
 
 
 

Views: 432

Comment

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Comment by yogesh shivhare on June 19, 2012 at 1:00pm

dhanyawad ...albela ji ...apka sneh se jo sambal paya hai usi ki numaish hai 

Comment by Albela Khatri on June 19, 2012 at 9:33am

wah waah khoobsoorat gazal

mubaraq ho yogesh ji !

Comment by Bhawesh Rajpal on June 19, 2012 at 5:52am
लकीरों पे ऐतवार इतना अच्छा नहीं 
कुछ कर खुदा को भी हैरत में डालिए 
 
बहुत खूब ! मुबारक ! 
Comment by yogesh shivhare on June 18, 2012 at 6:15pm

बहुत बहुत धन्यवाद् ...आपका स्नेह मिला आभार 

Comment by Ajay Singh on June 18, 2012 at 12:35pm

लकीरों पे ऐतवार इतना अच्छा नहीं 

कुछ कर खुदा को भी हैरत में डालिए 
                                                 really nice......
Comment by Yogi Saraswat on June 18, 2012 at 12:22pm
अदालतें थक गई है इन्साफ कर के 
मुमकिन हो तो खुद को बदल डालिए
बहुत सुन्दर अल्फाज़ ! बहुत खूब श्री शिवहरे जी

कृपया ध्यान दे...

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