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बादलों पे
थिरकता है हुस्न
अरमानों की
मखमली चादर ओढ़े...
कजरारे नशीले नैन
मासूमियत से मुस्कुराते हैं,
निगाहों निगाहों में 
बूझ पहेलियाँ...
होठों पर लहराती
गुनगुनाती हँसी
सागर की चंचल लहरों सी,
करती है अठखेलियाँ...
गीले चमकीले
मोतियों के चिराग
झिलमिलाते है रिमझिम
गेसुओं पर...
हया की सुर्ख रंगत
बन सोलह  श्रृंगार
देती है
चांदनी सा निखार...
दिल की धड़कन की मदहोशी में
कभी हलचल कभी खामोशी में,
खो जाते हैं
सारे शब्द और भाव...
और
मन होता है
सपनों के बीच..
...............जब
देते हैं दस्तक
मोहब्बत के कदम
जीवन के प्रांगण में.....
 
डॉ. प्राची.....

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Comment by Bishwajit yadav on June 14, 2012 at 11:25pm
आदरणीया प्राची जी

दिल की धड़कन की मदहोशी में
कभी हलचल कभी खामोशी में,
खो जाते हैं
सारे शब्द और भाव...
और
मन होता है
सपनों के बीच..
...............जब
देते हैं दस्तक
मोहब्बत के कदम
जीवन के प्रांगण मे

बहुत खुब क्या बात है बहुत अच्छा भाव जय हो
Comment by Ajay Singh on June 14, 2012 at 6:15pm

मासूमियत से मुस्कुराते हैं,

निगाहों निगाहों में      ........ .. . . . . . . . Bahut khub...
Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 14, 2012 at 4:43pm
आदरणीया प्राची जी, मोहब्बत होने के एहसास को खूबसूरती से व्यक्त किया आपने।
Comment by DEEP ZIRVI on June 14, 2012 at 2:49pm

वाह से कुछ ज्यादा hee

Comment by Raj Tomar on June 14, 2012 at 2:16pm

गीले चमकीले

मोतियों के चिराग
झिलमिलाते है रिमझिम
गेसुओं पर...
हया की सुर्ख रंगत
बन सोलह  श्रृंगार
देती है..
 अहा .. बहुत खूब बहुत खूब. :)
Comment by SHARIF AHMED QADRI "HASRAT" on June 14, 2012 at 1:25pm

bahut hi sundar kavita he prachi ji bahut bahut mubarak ho

Comment by Albela Khatri on June 14, 2012 at 1:02pm

वाह  वाह डॉ प्राची सिंह जी,,,,,,,,,
बहुत खूब.........शानदार कविता कही आपने........मोहब्बत  और जज़्बात को सुन्दर शब्दों में पिरोने का हुनर खूब आता है आपको
_____बधाई बधाई  बधाई

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 14, 2012 at 10:52am

आदरणीया प्राची जी, सादर 

मेरा सौभाग्य है कि हिंदी , अंग्रेजी न जानते हुए भी कविता का पूर्ण आनंद ले लेता हूँ. अति सुन्दर. बधाई.

Comment by AVINASH S BAGDE on June 14, 2012 at 10:31am

sunder kavita k sath suprabhat....

Comment by AVINASH S BAGDE on June 14, 2012 at 10:30am

और

मन होता है
सपनों के बीच..
...............जब
देते हैं दस्तक
मोहब्बत के कदम
जीवन के प्रांगण में.....
 
डॉ. प्राची ji ...sunder shabd-chitr ukera hai aapane...
कजरारे नशीले नैन
मासूमियत से मुस्कुराते हैं,
निगाहों निगाहों में ....wah!
गीले चमकीले
मोतियों के चिराग
झिलमिलाते है रिमझिम
गेसुओं पर......shabdo ke motiyo se kya khoob piroya hai aapane is sunder mala(rachana) ko...
bahut sunder.

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