For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मेरा विचार है,

डाक्टरी करके 
दवाखाना खोलने का
किन्तु सोचती हूँ 
जो किसी दिन 
आ पहुंचा इमांन 
अपने कटे हाथ को, 
रिसते खून  के साथ लेकर,
जो आ पहुँची इंसानीयत, 
अपने बांझपन के इलाज  के लिए
या सत्य,
 अपने शरीर पर कुंठा से बनी 
केंसर गाठे लिये,
सोचती हूँ तब क्या मैं सक्षम  हो पाऊँगी ?
बदलती दुनिया मैं उन्हें दवा दे पाऊँगी?

Views: 436

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on May 6, 2012 at 12:39pm

सुन्दर रचना के लिए बधाई इति जी

Comment by Iti Sharma on May 6, 2012 at 12:32pm

धन्यवाद्  एवं आभार  आप सभी का 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 3, 2012 at 10:22am
अभिन्न दोस्त इति,
बहुत सुन्दर समसामयिक कविता... क्षत विक्षत  ईमान, बाँझ इंसानियत, और कुंठा ..... इनका इलाज काश डॉक्टर  कर पाते ....
इन मर्जों को तो समाज को खुद ही HEAL करना पड़ता है..
गहन भावों को समेटे इस व्याप्त सामाजिक विरूपता को दूर कैसे किया जाए...ये सोचने की तरफ इशारा करती इस काव्य कृति के लिए बधाई इति..
Comment by वीनस केसरी on May 2, 2012 at 11:23pm

यही यक्ष प्रश्न है सबके पास 
और यह प्रश्न भी किसी और से नहीं खुद से है
जवाब भी खुद ही खोजना है

सुन्दर रचना के लिए बधाई

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 2, 2012 at 2:16pm

aadarniya iti sharma ji, saadar

vastav main goodh prashn hai. sundar rachna hetu badhai.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 2, 2012 at 10:12am

बहुत ही गहरी बात, कह दी है, बिम्ब भले ही अलग है किन्तु परिणाम स्वरुप यह कविता बहुत कुछ कहने में सक्षम है, बधाई स्वीकार करें , इति शर्मा जी |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 1, 2012 at 3:51pm

अच्छा प्रयास है, बधाई.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 1, 2012 at 1:05pm

अंतरात्मा से निकला हुआ प्रश्न ! मेडिकल प्रोफेशन   पर कटाक्ष ! उत्तर भी अंतरात्मा से ही मिलेगा .....बहुत विचारणीय रचना 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहे   चलती तब भी साइकिल, चले नहीं जब कार। हिन्दुस्तानी   हम   कभी,…"
7 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी,  चित्र अनुरूप सुंदर दोहे।  हार्दिक बधाई। अंधेर का अर्थ अत्याचार अन्याय…"
14 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी  विस्तार से आपने वर्तमान स्थिति और चित्र के अनुरूप दोहे की रचना की है।…"
31 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"दीपक तल अंधेर है, यही चित्र का सार। आँगन गंगा धार पर,सहे प्यास की मार।।......वाह ! वक्रोक्ति का…"
31 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय सौरभ भाईजी , आपकी टिप्पणी सर्वथा उचित है।  चित्र को एक दो बार देखने के बाद भूल सा गया…"
37 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"पका न पाती  रोटियाँ, भले  युद्ध की आगजला रही है नित्य पर, वह निर्धन का भाग।।..... वाह !…"
37 minutes ago
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"गमलों में अब पेड़ हैं, पौधों के हैं हाट। लाखों घर बनते गए, वन उपवन सब काट॥...विकल्प गैस का नहीं. वन…"
45 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण भाईजी,  मेरी कोशिश की प्रशंसा हेतु हार्दिक धन्यवाद ।"
53 minutes ago
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रथम दोहे की पहली पंक्ति कृपया इस तरह पढ़ें  / बाँध साइकिल लकड़ियाँ, वृद्ध  चला घर ओर/"
4 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"दोहा छंद _______ बाँध साइकिल लकड़ियाँ, जाता घर की ओर। ख़त्म हो गई गैस है,पेट मचाए…"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी,    आग बुझाने पेट की, जूझ रहा दिन-रात  बुरे किये …"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश भाईजी, आपकी दोहावली आजके माहौल को समेटते हुए प्रदत्त चित्र के आलोक में हुई…"
6 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service