For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कितना अच्छा लगता है

कितना अच्छा लगता है

यूँ अनायास मिलना

दुनियाँ के गलियारों में

साथ-साथ फिरना

 

अभी छू गई है

पुरवाई गालों को

दे गया चुनौती कौन

दर्द के उबालों को

 

दहलीज को चूम रहे

आँगन अमलतास के

उधेड़ दो न अब घूंघट

क्षणजीवी प्यास के

 

कितनी भारी है

आँखों का सूनापन

सोया सा लगता है

सांसों का सूनापन

 

मन से टकराता है

ऐसे सन्नाटा

कंठ में चुभे जैसे

सेही का कांटा

 

पोर पोर में सरसों फूली

आँखें रसमसाती

मधु अतीत की सुगंध पीकर

पांखें कसमसाती

Views: 647

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 8, 2012 at 9:53am

आदरणीय भ्रमर जी ! जय श्री राधे. रचना की सराहना के लिए आभार.

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 8, 2012 at 9:51am

आदरणीय जवाहर जी ! सादर अभिवादन!  सराहना के लिए आभार.

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 8, 2012 at 9:50am

आदरणीय गणेश जी ! सादर अभिवादन! रचना की सराहना के लिए आभार.

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 8, 2012 at 9:49am

आदरणीय प्रदीप जी ! सादर अभिवादन! सराहना के लिए आभार.

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 8, 2012 at 9:47am

धन्यवाद !मृदु जी.सराहना के लिए आभार.

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 8, 2012 at 9:44am

संदीप जी !सादर अभिवादन! मैं तो आपकी गजलों का  प्रशंसक हूँ.आपकी सराहना मिली,अच्छा लगा.

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 8, 2012 at 9:40am

धन्यवाद ! महिमा जी.आपको रचना पसंद आई,यह जानकर अच्छा लगा.सराहना के लिए आभार.

Comment by RAJEEV KUMAR JHA on April 8, 2012 at 9:37am

सादर अभिवादन! आदरणीया राजेश कुमारी जी.सराहना के लिए आभार.

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 8, 2012 at 12:04am

पोर पोर में सरसों फूली

आँखें रसमसाती

मधु अतीत की सुगंध पीकर

पांखें कसमसाती..

राजीव जी गजब का शब्द बंधन और पोर पोर में रम जाने वाले भाव ...मुबारक हो 
जय श्री राधे 
भ्रमर 5


Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 7, 2012 at 7:56am

अभी छू गई है

पुरवाई गालों को

दे गया चुनौती कौन

दर्द के उबालों को

भावाभियक्ति एवं मर्म का स्पष्ट चित्रण करती रचना पर बधाई स्वीकार करें!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

निर्वाण नहीं हीं चाहिए

निर्वाण नहीं हीं चाहिए---------------------------कैसा लगता होगाऊपर से देखते होंगे जबमाँ -बाबाकि…See More
25 minutes ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . .अधर

दोहा पंचक. . . . . अधरअधरों को अभिसार का, मत देना  इल्जाम ।मनुहारों के दौर में, शाम हुई बदनाम…See More
25 minutes ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी सदस्यों को सादर सप्रेम राधे राधे सभी चार आयोजन को को दो भागों में विभक्त किया जा सकता है। ( 1…"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"चर्चा से कई और पहलू, और बिन्दु भी, स्पष्ट होंगे। हम उन सदस्यों से भी सुनना चाहेंगे जिन्हों ने ओबीओ…"
23 hours ago
pratibha pande replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय मिथिलेश जी के कहे से मैं भी सहमत हूँ। कैलेंडर प्रथम सप्ताह में आ जाय और हफ्ते बाद सभी आयोजन…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी आदरणीय को नमस्कार। आदरणीय तिलक राज कपूर जी का ये उत्तम विचार है। अगर इसमें कुछ परेशानी हो तो एक…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .युद्ध

दोहा सप्तक. . . . . युद्धहरदम होता युद्ध का, विध्वंसक परिणाम ।बेबस जनता भोगती ,  इसका हर  अंजाम…See More
Friday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"इस सारी चर्चा के बीच कुछ बिन्दु और उभरते हैं कि पूरे महीने सभी आयोजन अगर ओपन रहेंगे तो…"
Friday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आदरणीय, नमस्कार  यह नव प्रयोग अवश्य सफलता पूर्वक फलीभूत होगा ऐसा मेरा विश्वास है तथा हमें…"
Thursday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सुझाव सुन्दर हैं ।इससे भागीदारी भी बढ़गी और नवीनता भी आएगी । "
Thursday

मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi" replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
" कृपया और भी सदस्य अपना मंतव्य दें ।"
Wednesday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"तरही का मुख्य उद्देश्य अभ्यास तक सीमित है, इस दृष्टि से और बहरों पर भी तरही मिसरे देना कठिन न होगा…"
Mar 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service