For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"ख़ुशी"जब चाहत का इकरार होता है महबूब के नज़र में...

Views: 477

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Subodh kumar on September 12, 2010 at 1:15pm
dhanyabaad ashish jee
Comment by Subodh kumar on September 12, 2010 at 1:14pm
Dhanyabaad Bagi jee
Comment by Subodh kumar on September 12, 2010 at 1:14pm
dhanyabaad admin jee..
Comment by आशीष यादव on September 4, 2010 at 10:27am
सुबोध जी प्रणाम,
आप की यह ग़ज़ल सच मानिए तो मेरे ह्रदय को स्पर्श कर गयी है| बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल की उत्पत्ति| तसव्वुर का शानदार आलम पेश किया है आपने|

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 4, 2010 at 10:07am
वाह शरद बाबू वाह, क्या मैं कहूँ समझ मे नहीं आ रहा है, आपने तो इस ग़ज़ल से कुछ जख्मों को हरा कर दिया और जन्नत के रंगत को बड़े ही करिश्माई अंदाज मे दिखा दिया है, बहुत ही सुंदर और उच्चे ख्यालात का ग़ज़ल पेश किया है आपने, बधाई स्वीकार करे |
Comment by Admin on September 3, 2010 at 8:42pm
आदरणीय सुबोध जी, सर्वप्रथम तो मैं ओपन बुक्स ऑनलाइन के मंच पर आपके पहली रचना का दिल से स्वागत करता हूँ, उम्मीद है आगे भी आप की रचनाएँ और अन्य रचनाओं पर आपके बहुमूल्य टिप्पणी पढने को मिलेगी | आप ने बहुत ही खुबसूरत ग़ज़ल कहा है, प्यार तो इक एहसास है जो महसूस किया जाता है, इस उम्द्दा अभिव्यक्ति पर बधाई स्वीकार कीजिये |
Comment by Subodh kumar on September 3, 2010 at 8:15pm
yeh ghajal maine us ehsas ko man mein rakh kar likha tha ki jab kisi ki chahat koi achaanak maan leta hai..to uske man mein kitni khushi hoti hogi...

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"एक सप्ताह के लिए सभी चार आयोजन के द्वार खुल गए। अच्छी बात ये है कि यह एक प्रयोग है ..... लेकिन…"
16 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ++++++++   ठंड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं…"
16 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सच फ़साना नहीं कि तुझ से कहें ये बहाना नहीं कि तुझ से कहें दिल अभी जाना नहीं कि तुझ से कहें ग़म…"
20 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सादर अभिवादन "
20 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी की नमस्कार, यूँ तो आज आयोजन प्रारंभ ही हुए हैं और किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है,…"
23 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"स्वागतम"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आपकी बात से सहमत हूँ। यह बात मंच के आरंभिक दौर में भी मैंने रखी थी। अससे सहजता रहती। लेकिन उसमें…"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .विविध

दोहा सप्तक. . . . . . विविधकभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।सुलझेंगे उलझे हुए,  अंतस के हालात…See More
Monday
amita tiwari posted blog posts
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service