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बेवफाई भी ज़रूरी है वफ़ा से पहले !!

मर्ज़  जिस  तरह  से  लाजिम  है  दवा  से  पहले  !

बेवफाई  भी  ज़रूरी  है  वफ़ा  से  पहले  !!
ख्वाहिश  ऐ   दीद  है  यूँ   दिल  को  क़ज़ा  से  पहले  !
तुमसे  मिलने  की  तमन्ना  है  खुदा  से  पहले  !!
आरजू  तो  है  चरागों   को  जलाने  की  मगर  !
मुझको  मालूम  तो  करने  दो  हवा  से  पहले  !!
जब  मेरा  साथ  निभाना  ही  नहीं  था  तुमको  !
क्यों  दिए  मुझको  मुहब्बत  में  दिलासे  पहले  !!
सिर्फ  खिलअत  से  नहीं  आबरू  औरत  की  'हिलाल ' !
शर्म  आँखों  में  रखी  जाये  रिदा  से  पहले  !!

 

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Comment by Hilal Badayuni on October 10, 2011 at 2:42pm

shukriya siya sahiba aur mazhar sahab aapki muhabbato ka bahut bahut shukriya

Comment by siyasachdev on October 8, 2011 at 11:42am

bahut khoob umda sher kahe hain behtareen aashar..khoobsurat ghazal...

Comment by Mazhar Masood on October 7, 2011 at 11:29pm

Bahut  achhay  , bahut dinon kay baad  padha .  Idhar main beemar raha phir baahar aaya hua hoon.  likhtay rahiye  " HILAL  Saheb "   Mazhar Masood

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