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जब्त किये है तुमने जो अल्फाज़ अभी वापस दे दो
अपने हिस्से की थोड़ी आवाज अभी वापस दे दो

मेरा ग़म, दिल की मायूसी, या फिर मेरी तन्हाई
दिल में छुपाये मेरे सारे राज अभी वापस दे दो

सूरज से जो लड़ आये थे खालिस जेठ महीने में
उन मदमस्त परिंदों की परवाज़ अभी वापस दे दो

सीमा पार से जो आया है वो बारूद है कर्जे का
मूल को छोड़ो ब्याज बहुत है ब्याज अभी वापस दे दो


अब एक प्यारा सा गाना भी सुनते जाइये

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Comment by satish mapatpuri on August 9, 2010 at 3:51pm
जब्त किये है तुमने जो अल्फाज़ अभी वापस दे दो
अपने हिस्से की थोड़ी आवाज अभी वापस दे दो

मेरा ग़म, दिल की मायूसी, या फिर मेरी तन्हाई
दिल में छुपाये मेरे सारे राज अभी वापस दे दो
बहुत खूब राणा जी , बधाई.

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 9, 2010 at 5:28am
जब्त किये है तुमने जो अल्फाज़ अभी वापस दे दो
अपने हिस्से की थोड़ी आवाज अभी वापस दे दो,
बहुत बढ़िया राणा जी , एक उम्द्दा सोच के साथ अच्छा ग़ज़ल निकाला है आपने , Good ,
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on August 8, 2010 at 11:26pm
मेरा ग़म, दिल की मायूसी, या फिर मेरी तन्हाई
दिल में छुपाये मेरे सारे राज अभी वापस दे दो

waah rana bhai waah kya likha hai aapne dil khush ho gaya padh kar...aur gaana to lajawab hai bhai....aap bhi dil khush karne wale insaan hai....bahut badhiya bhai...
aur ek main bhi sheyar likh deta hoon....
TUTE HUE DIL KO KABHI JODA NAHI KARTE,
JODNA HAI TO YAADON KO JODO DIL TO FIR BHI JUD JATE HAIN.....

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