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दो सीधे से सवाल का जवाब दोस्तों ,
क्यों पी रही है मुझको ये शराब दोस्तों ,

मैने शराब पी थी गम भुलाने के लिए
बढ़ने लगी है क्यों मेरी अजाब दोस्तों,

माना कि पी गया मै जश्ने यार मे बहुत ,
डर है जिगर न दे कहीं जवाब दोस्तों ,

इतनी ही गर हसीं है ये प्याले की महेबुबा,
फिर क्यों मिला रहे सुरा में आब दोस्तों,

मैने जवानी जाम संग बितायी शान से,
चर्चा हुई बुढ़ापे की ख़राब दोस्तों ,

कितनी ही मिन्नतों के बाद जिंदगी मिली,
ना खाक में मिले ये माँ का ख्वाब दोस्तों,

"बागी" ने अपना मान के कहा है धीरे से,
नासाज गर लगे तो है किताब दोस्तों ,

( अजाब = दर्द , आब = पानी , नासाज = असहमत )

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Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on August 7, 2010 at 3:29pm
माना की पी गया जश्ने बहार मे बहुत ,
डर है जिगर न दे कही जवाब दोस्तों ,

वाह गणेश भैया वाह....बहुत सही कहा आपने....
वैसे बात सही भी हिया कभी कभी लोग महफ़िल मे दोस्तो के साथ रहने पर कुछ ज़्यादा ही पी लेते हैं....
और ये बात तो है ही की शराब के पहले ग्लास को आदमी पीता है,दूसरे को शराब खुद शराब को पीता है लेकिन 2 के बाद होने पर शराब आदमी को पीने लगता है....
बहुत बढ़िया ग़ज़ल बनाया आपने गणेश भैया.....
Comment by baban pandey on August 7, 2010 at 1:55pm
वाह गणेश भाई ,...शराब की जिक्क्र तो हुआ .भाई ...शवाव का नहीं ..बिना पिए भी आप ने लिखी
क्या बात है ...बधाई
Comment by asha pandey ojha on August 7, 2010 at 12:54pm
गणेश भैया बहुत खूब कही आपने और व्याकर्ण की ग़लतियाँ तो योगराज भैसाब ज्यदा थी बता पाएँगे भाव तो बहुत ही लाज़वाब है .. बधाई
Comment by Prabhakar Pandey on August 7, 2010 at 12:28pm
है जिन्दगी मिली बड़ी मिन्नतो के बाद ,
मिले न खाक मे कही माँ का ख्वाब दोस्तों,..........बहुत ही सार्थक एवं उत्कृष्ट...शिक्षाप्रद। सादर आभार।।
Comment by sunil pandey on August 7, 2010 at 10:02am
kya bat hai.......very nice
Comment by praveena joshi on August 7, 2010 at 9:43am
bahut badhiya aur khubsurt sabto ka taalmel hai .dil se likhi gayee hai. so ek msg bhi milta hai ki drink karne ka kya parinaam milega.
Comment by आशीष यादव on August 7, 2010 at 6:23am
Good, sundar rachna

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