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"बारहमासा"
"चैत्र" मे चित चिंतित, चंचल चहु चकोर।
प्रिया बिन सब सूना लगे, ना सुझे कौर॥
"वैशाख" वैरी विष समान, वल्लरी बन विलगाय।
दोबारा फूल खिलेंगे तभी, अनुकूल रितु को पाय॥
"ज्येष्ठ"; ज्वाला ज्वर जवान, तन-मन लागी आग।
प्रेम में बस यह दिया है, मिले दाग ही दाग॥
"आषाढ" आया आम्र-बौर, आग आक्रोश आकार।
अकेला मैं सुनो प्रिये, असहाय हर प्रकार॥
"श्रावण" सारा सम शशि, शीश लगे पूछ ओर।
वह तो करे सब प्रेमवश, सुप्रभात बुरा दौर॥
"भाद्रपद" भया भ्रमपूर्ण’ भय की शुरुआत।
विरहाग्नि प्रबल हुई’ लगी अंग-अंग खात॥
"आसौज" आया चौमासा गया, रहा खाली का खाली।
समाज-मर्यादा प्रधान रही, प्रिया कोयल मतवाली॥
"कार्तिक" कमनीय कौमार्य, काम लगे हर अंग।
पल-पल मैं यही सोचता, स्यात मिले प्रिया संग॥
"मार्गशीर्ष" मर्ममय मन, मैं मर्माहत मतंग।
मारा-मारा मर रहा’ कब जीत मिले प्रेम जंग॥
"पौष" प्रिया पास नहीं, परे-परे जाती जाए।
प्राण निकलकर अटके हलक, मरणासन्न कहलाए॥
"माघ" मारा मर रहा मैं, मिमियाना गया बेकार।
जनता-जनार्दन को सुने नहीं, चुनी हुई सराकार॥
"फाळ्गुन" फंसा फहमी गलत, बस आश्वासन मिलते।
षड रितु, बारहमाश अरि; क्यों पूल प्रेम के खिलते॥
                "आचार्य शीलक राम"

रचना "मौलिक व अप्रकाशित" है।

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Comment by आचार्य शीलक राम on December 29, 2022 at 8:51pm

Dr.Prachi Singh

जी आदरणीय

Comment by आचार्य शीलक राम on December 29, 2022 at 8:51pm

Samar kabeer

जी आदरणीय

Comment by Samar kabeer on December 12, 2022 at 2:23pm

जनाब आचार्य शीलक़ राम जी आदाब,ओबीओ पटल पर आपका स्वागत है I 

रचना का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें, मुहतरमा प्राची सिंह जी की टिप्पणी का अबापने अभी तक जवाब नहीं दिया, और देख रहा हूँ कि आप कई रचनाएँ मंच पर पोस्ट कर चुके हैं, ये सीखने सिखाने का मंच है, अगर आप वाक़ई सीखने के उद्देश्य से मंच के सदस्य बने हैं तो आपको हर टिप्पणी का उत्तर देना चाहिए,और सिर्फ़ एक के बाद एक रचना पोस्ट करना है तो करते रहें,एक बात ये कि मंच पर आई हुई दूसरी रचनाएँ भी आपकी क़ीमती टिप्पणी के इंतिज़ार में हैं इस तरफ़ भी ध्यान दें I 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 2, 2022 at 7:41pm

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति आदरणीय 
यह रचना दोहा छंद के बहुत निकट है , बस थोड़ा सा लय और मात्रिकता का ध्यान रख कर इस छंद को सहज ही साधा जा सकता है..

इस रचना पर  मैं विस्तार से आती हूँ तब तक निवेदन है कि भारतीय छंद विधान समूह में संग्रहीत मात्रिकता और छंदों के कुछ आवश्यक मूलभूत आलेखों का अवलोकन कर लीजिये

सादर  

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