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दोस्तों आज देश के उपर कुछ पंक्तियाँ लिखने जा रहा हूँ......................

जब आज़ाद हुआ था भारतवर्ष,
एक सपना सबने देखा था,
जैसे चाँद चमकता है तारों मे,
वैसा होगा देश कुछ सालों मे,
देश हमारा करेगा विकास,
गाँधी जी की यही थी आस,
खुदा भी देगा अपना साथ,
ऐसा उनका था विश्वास.

आज 64 साल हुए,
हम सब को आज़ाद हुए,
लेकिन क्या एक पल को सोचा,
क्या से क्या हालात हुए,
कल अँग्रेज़ों ने राज किया था,
हमें बहुत बर्बाद किया था,
लेकिन क्या हम आज आज़ाद हैं?
सारी खुशियाँ क्या हमारे पास है?
जकड़े हुए हैं हम आज उन बेलों से,
जो हमारे ही आँगन बागवान ने लगाई है,
फूल तो तोड़े जातें हैं,
लेकिन पत्तों को छोड़ जाते हैं,
सीचती है जो धारा हमे,
हम उससे उखड़े जाते हैं,
क्या एक पल को सोचा है तुमने,
ये सब क्यू सहते जाते हैं ,

लिखा है पीर फकीरों ने,
पाप बड़ा तो है मगर,
सहना पाप को उससे बड़ा है पाप,
यह किया तो काम का नही कोई मंतर का जाप,
खुदा उसी का होता है,
सम्मान के खातिर प्राण त्यागने को,
जो सदा ही तत्पर हो,
देश के लिए कुछ कर गुज़रने का,
सच्चा जूनून जिसके सर हो,

इतिहास गवाह है इस बात का,
हर युग मे कोई महापुरुष होता है ,
जो बुलबुले की तरह कुछ पल,
जी कर भी सबसे उँचा रहता है,
हम महापुरुष ना सही लेकिन,
इंसान तो सच्चे बन सके,
कुत्ता भी बैठने से पहले,
फर्श को सॉफ करता है ,
फिर हम इंसान होकर भी,
कचरे को क्यू ना सॉफ करें?,

वक़्त नही है ठहरता किसी के लिए,
सागर की लहरों की तरह ,
पानी बरसात का गर बहा नही,
तो सर तक को डूबा देता है ,
गर वन की आग को शुरू मे,
ना रोका गया तो खाक कर देता है
अब भी ना गर समझे देशवासियों,
तो रह जाओगें ताकते,
छूटे हुए मुसाफिर की तरह |

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 9, 2012 at 4:08pm

mahan vichar. badhai. 

Comment by Rohit Singh Rajput on July 20, 2011 at 12:30am
publish ho gaya h kya????
Comment by Rohit Singh Rajput on July 20, 2011 at 12:29am
nice

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