For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दिन दीन हो चला

एक मजदूर जननी एक मजबूत जननी


कितने आलसी हो चले हैं दिन
कितनी चुस्त हो चली हैं रातें
इधर खत्म से हो चले किस्से
उधर खत्म सी हो चली बातें

जानते थे दिन कि
अब क्यों हो चले है ऐसे
जानते थे दिन कि
कभी नहीं थे ऐसे ऐसे
सुनते थे कि दिन -दिन का फेर होता है
सुनते थे कि इंसाफ मे देर हो भी जाये
सुनते थे कि इंसाफ मे अंधेर नहीं होता है

पर दिन का एक नकाब क्या उतरा
कि दिनअनजाना सा लगने लग गया
दिन के उजाले को क्या चौंधा
कि उजालों से डर लगने लग गया

रातों को पर्दे देने वाला दिन
रातों को दर्दे देने वाला दिन
दिन वही दिन दीन हो चला
मजदूर के संग चला रात भर
सुबह होते ही क्षीण हो चला

एक मजदूर जननी
एक मजबूर जननी
खुले बेबाक दिन मे
प्रसव वेदना को देती चुनौती
जब चौराहे को लजाती है
सो जाता दिन जब पर्दों मे
दोपहरी मे रात को बुलाती है
बन जाती वो वज्र सुदर्शन चक्र
उत्तरा गर्भित भ्रूण को बचाती है
हफ्तों के गहरे श्वास- उच्छवास
ले लंबे दिनो के जबरन उपवास
दधिची सी निज हाड़ गलाती है
रुकती नही ,झुकती नही
गर्भनाल काटती नहीं
गर्दन संभाले ,चलती जाती है
वो एक मजदूर जननी
वो एक मजबूर जननी
खुले दिन मे
मर्दानगी के लिए मुरदानगी
का नायाब तमगा दे जाती है
रुकती नही ,झुकती नही
गर्दन संभाले चलती जाती है
एक मजदूर जननी
एक मजबूत जननी

.............

मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 42

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on June 4, 2020 at 7:47am

आदरणीया अमिता जी बहुत ही अच्छी रचना है, आज मजदूरों की भावनाओं को समझने वाले कम हैं, सुंदर रचना के लिए बहुत बहुत बधाई

Comment by Samar kabeer on June 2, 2020 at 3:04pm

मुहतरमा अमिता तिवारी जी आदाब, अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

रवि भसीन 'शाहिद' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post तेरे ख्वाहिशों के शह्र में- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' भाई, अच्छी ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें!"
29 minutes ago
Rupam kumar -'मीत' posted a blog post

वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गया (ग़ज़ल)

बह्र-221/2121/1221/212वो मेरी ज़िंदगी को सदा छोड़ क्या गयाआँखों से प्यार का मेरे मौसम चला गया[1]वो…See More
31 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post छत पे आने की कहो- ग़ज़ल
"आ. भाई बसंत कुमार जी, सादर अभिवादन । वर्षा रितु के हिसाब से उत्तम गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
55 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

तेरे ख्वाहिशों के शह्र में- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'(गजल)

२२१/२१२१/१२२१/२१२१/२लिखना न मेरा नाम तेरे ख्वाहिशों के शह्र मेंआयेगा कुछ न काम तेरे ख्वाहिशों के…See More
1 hour ago
Neelam Dixit posted a blog post

गीत- नेह बदरिया नीर नदी बन

नेह बदरिया नीर नदी बनआंखों आंखों स्वप्न सधे हैंकाजल की काली रेखाएंसरिता पर ज्यूँ बांध बांधें हैं।नख…See More
1 hour ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

छत पे आने की कहो- ग़ज़ल

मापनी २१२२ २१२२ २१२२ २१२ इस जिग़र में प्यास बाकी है बुझाने की कहो, झूमती काली घटा से छत पे आने की…See More
1 hour ago
Usha Awasthi commented on Usha Awasthi's blog post उरिझै कवनेउ मंद
"हार्दिक धन्यवाद डा0 प्राची सिंह जी, मुझे मालूम है कि मैं इसे बेहतर लिख सकती थी । मैंने इसको केवल…"
11 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on Neeta Tayal's blog post कोरोना और सावन
"प्रिय नीता ये मंच साहित्य का गुरुकुल है, ऐसा अप्रतिम गुरुकुल जहाँ सब एक दूसरे को पढ़ते हुए ,…"
11 hours ago
Neeta Tayal commented on Neeta Tayal's blog post कोरोना और सावन
"बहुत बहुत आभार सखी, तुम्हारे गाइडेंस में मुझे बहुत सीखना है"
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on Vinay Prakash Tiwari (VP)'s blog post कामोदसामन्त : विनय प्रकाश
"आ० विनय जी सुन्दर द्विपदियाँ कही हैं आपने भाव बहुत प्यारे है लेकन शब्दों में थोड़ी…"
14 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on Usha Awasthi's blog post उरिझै कवनेउ मंद
"अहा ! आनंदित करता दोहा प्रयास बहुत सुन्दर शिल्प कहीं कहीं कमज़ोर रह गया,, सतत अभ्यास…"
15 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Dr.Prachi Singh commented on Neeta Tayal's blog post कोरोना और सावन
"प्रिय सखी नीता तुम्हारा मंच पर तुम्हारी पहली रचना के साथ बहुत बहुत स्वागत है आंचलिक शैली…"
15 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service