For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

राष्ट्र धर्म - लघुकथा -

राष्ट्र धर्म - लघुकथा -

परिवार के सभी लोग शाम सात बजे का महाभारत का टी वी पर प्रसारण देख रहे थे।तभी  मोबाइल बज उठा।सभी का ध्यान बंट गया।मैं मोबाइल लेकर मेरे कमरे में चला आया।

मोबाइल कान पर लगाया।"हल्लो सिंह साहब, वर्मा बोल रहा हूँ।"

"बोलिये वर्मा जी, कैसे मिजाज हैं?"

"क्या बतायें सर, इस लॉक डाउन ने सब गुड़ गोबर कर रखा है।"

"हाँ थोड़ी परेशानी तो है ही।बोलो कैसे याद किया?"

"भोजन हो गया क्या?"

"आजकल रात्रि का भोजन तो महाभारत के पश्चात ही होता है।"

"मतलब अभी थोड़ी देर फ़्री हैं ना?"

"हाँ क्यों बोलो?"

"अभी आता हूँ पाँच दस मिनट में।"

मैं एक अजीब से असमंजस में आ गया। क्या समस्या आ गयी वर्मा जी को।हमारी ही सोसाइटी की बिल्डिंग बी-टू में रहते थे।अगले पाँच दस मिनट मेरे बड़ी बेचेनी से कटे।आजकल हमेशा एक ही डर होता था कि किसी के कोरोना होने की खबर ना मिले।

मैं इसी उधेड़्बुन में उलझा था कि वर्मा जी आ गये।सीधे उन्हें मेरे ही कमरे में ले आया।

आते ही उन्होंने कंधे पर लटका बैग उतार कर कंप्यूटर टेबल पर रखा।

जैसे ही वे बैग खोलने लगे,"इसमें क्या है वर्मा जी?"

"अरे सर बड़ी मुश्किल से जुगाड़ किया है।कितने दिन हो गये साथ बैठे हुए।"

इतना बोलते ही वर्मा जी ने बैग से पीटर स्कॉच की बोतल और तंदूरी चिकन का पॉकेट निकाला।

"नहीं वर्मा जी, अभी इस सब के लिये यह उचित समय नहीं है।"

"क्या कह रहे हैं सर ? कितनी भाग दौड़ करनी पड़ी है।"

"आप खुद ही सोचो वर्मा जी, सारा देश भीषण कोरोना वाइरस से त्राहि त्राहि कर रहा है। कितनी बड़ी विपदा से जूझ रहा है।।देश की आधी आबादी भूखी सो रही है और इन हालात में हम  पार्टी करें। इंसान होने के थोड़े तो प्रमाण दो। हैवान मत बनो।"

मौलिक, अप्रकाशित एवम अप्रसारित

Views: 77

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by TEJ VEER SINGH on April 24, 2020 at 9:28pm

हार्दिक आभार आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'जी। आप लघुकथा की मूल भावना को समझ पाये और साथ ही उसकी व्याख्या भी समुचित तरीके से की।पुनः आभार।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on April 23, 2020 at 1:58pm

आद0 तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन। बड़ी मार्मिक बात लघुकथा के माध्यम से कही आपने। काश हर आम ओ शख्स जो भी इस योग्य है, अगर यह सोचने लगे तो कोई भूखा न सोवे और यहीं राष्ट्र धर्म भी है। बधाई स्वीकारें इस उत्तम लघुकथा पर

Comment by TEJ VEER SINGH on April 22, 2020 at 10:00am

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।आपने लघुकथा के मर्म और उसकी उपयोगिता को समझा तथा उसकी सारगर्भित विवेचना के लिये पुनः आभार।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 22, 2020 at 6:49am

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । समूहिक आपदा के समय भी निज आनन्द के लिए उतावले लोगों की सचमुच कमीं नहीं है । आये दिन इस तरह के समाचार आ रहे हैं कि इस समय भी लोग किस तरह पिकनिक, जन्मदिन , विवाह की सालगिरह या अन्य निजी आनन्द के लिए देश समाज को विपदा की आग में झोंक रहे हैं । इसी मानसिकता को उभारती इस अच्छी लघुकथा के लिए दिल से बहुत बहुत बधाई ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"जरा याद उन्हें भी कर लो ================= जश्न मनाएँ आज़ादी कायाद मगर बलिदान करें |आज शहीदों का भी…"
45 minutes ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल..डरावनी सी रात थी बड़ा अजीब ख्वाब था-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"आदरणीय धामी जी ग़ज़ल पे आपकी उपस्थित उत्साहबर्धक है...हार्दिक आभार आपका"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आ. भाई सतविन्द्र जी, सादर अभिवादन । प्रदत्त विषय पर अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आ. भाई बासुदेव जी, सादर अभिवादन । दोहों की सराहना के लिए आभार।"
5 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post बड़ा दिन हो मुबारक
"आदरणीया Rachna Bhatia साहिबा, नज़्म में आपकी शिरकत और सुख़न-नवाज़ी के लिए तह-ए-दिल से आपका…"
6 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-जैसा जग है वैसा ही हो जाऊँ तो
"आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' साहिब, नमस्कार। हिन्दी की ख़ुशबू से महकती इस सुंदर ग़ज़ल…"
7 hours ago
Rachna Bhatia commented on रवि भसीन 'शाहिद''s blog post बड़ा दिन हो मुबारक
"आदरणीय रवि भसीन'शाहिद' जी बेहतरीन नज़्म लिखी। बधाई स्वीकार करें।"
8 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"कुछ गुम कुछ आगे दिखते थे, उनको याद करें शोणित से इतिहास रचे थे, उनको याद करें। स्वयं पेट को पट्टी…"
10 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

आज़ादी के पुनीत पर्व पर वीर रस की कविता

आज पुनः जब मना रहे हम, वर्षगाँठ आज़ादी कीआओ थोड़ी चर्चा करलें, जनगण मन आबादी कीजिन पर कविता गीत लिखूँ…See More
11 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' posted a blog post

ग़ज़ल-जैसा जग है वैसा ही हो जाऊँ तो

बह्र-ए-मीर पतझर में भी गीत बसंती गाऊँ तो जैसा जग है वैसा ही हो जाऊँ तोअंदर का अँधियारा क्या छट…See More
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आ. भाई बासुदेव जी, सादर अभिवादन । प्रदत्तविषय पर सुन्दर गीत रचा है । हार्दिक बधाई ।"
13 hours ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-118
"आ0 लक्ष्मण धामी जी बहुत सुंदर दोहे। बधाई। आजादी का पर्व है, घर घर मंगल गान।उड़े तिरंगा शान से, देश…"
13 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service