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दोहे -12 (पापा कहते थे)

धैर्य रखो मत हो विकल,सुन लो मेरी बात!
अल्प दिवस हैं कष्ट के ,होगी स्वर्ण प्रभात!!

लोभ कपट को त्यागकर,मीठी वाणी बोल!!
यह जीवन का सार है,सहज वृत्ति अनमोल!!

अपनापन गोठिल जहाँ,वहाँ परस्पर द्वंद !
पापा कहते थे वहाँ ,बढ़ते दुःख के फंद!!

भ्रष्ट आचरण त्यागकर,करना मधुरिम बात !
होगी वर्षा नेह की,प्यार भरी सौगात !!

पापा कहते थे सदा,सुन लो मेरे लाल!
जीवन में होना सफल ,बहके कदम सँभाल!!

सत्कर्मों से ही सदा,होता जग में नाम!
पापा की यह सीख थी,लो विवेक से काम!!
************************************
राम शिरोमणि पाठक"दीपक"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment

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Comment by ajay sharma on December 27, 2013 at 11:31pm

gothil ....?    naya suna hai ...kripya kar artha bhi bataye 

Comment by ram shiromani pathak on December 20, 2013 at 1:39am

बहुत बहुत आभार आदरणीय भाई राजेश  जी////////// सादर  

Comment by ram shiromani pathak on December 20, 2013 at 1:38am

इस अमूल्य सुझाव के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय सौरभ जी,,,कृपा कर एक बार और देख लें आदरणीय कही कोई गलती तो नहीं ............  सादर  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 20, 2013 at 12:35am

पापा कहते थे.. प्रभात कभी नहीं होगी.. यह हर हाल में होगा..

जय हो..

Comment by राजेश 'मृदु' on December 17, 2013 at 4:27pm

पापा की सीख को सुंदर तरीके से आपने प्रस्‍तुत किया है रामजी, आपको हार्दिक बधाई

Comment by ram shiromani pathak on December 17, 2013 at 12:11am

बहुत बहुत आभार भाई जीतेन्द्र जी। …  सादर 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 17, 2013 at 12:03am

पिता की सीख, हमेशा गंभीरता लिए होती है, हर एक दोहा जीवन की सफलता के लिए सार्थक सन्देश देता हुआ, बधाई स्वीकारें आदरणीय राम भाई

Comment by ram shiromani pathak on December 16, 2013 at 9:35pm

उत्साह वर्धन हेतु आभार आदरणीय गिरिराज जी,आप सही कह रहे है मुझसे गलती हुई  है । ..  सादर 

Comment by ram shiromani pathak on December 16, 2013 at 9:33pm

उत्साह वर्धन हेतु आभार आदरणीया मीना जी। ..  सादर 

Comment by ram shiromani pathak on December 16, 2013 at 9:32pm

मेरा प्रयास पर उत्साह वर्धन हेतु आभार आदरणीय आशुतोष जी। ..  सादर 

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