For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

२१२२ २१२२ २१२२ २१२२

दुश्मनी को भूल जाऊँ दोस्ती की बात तो हो

नफरतों को छोड़ भी दूँ इश्क़ के हालात तो हो।

मर चुके अहसास मेरे मान लेता हूँ चलो मैं

पर उधर भी तो पिघलता एक भी जज्बात तो हो।

जिंदगी में छा गया है अब अमावस सा अँधेरा

नूर सी चमके यहाँ भी चाँदनी इक रात तो हो।

हर कदम पर ठोकरें थकने लगा हूँ जूझ कर अब

जीतना मुमकिन नहीं है फिर चलो अब मात तो हो।

लो खड़ा है बिकने ‘चंदन’ इश्क़ के बाजार में अब

वो खरीदेगा मुझे क्या उसकी यह औकात तो हो 

मौलिक/अप्रकाशित

आशीष कुमार "चंदन"

Views: 679

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on December 18, 2018 at 7:03pm

' जिंदगी में छा गया है अब अमावस सा अँधेरा'

ऐब-ए-तनाफ़ुर,कहते हैं,एक शब्द के अंतिम अक्षर और उसके बाद आने वाले शब्द का पहला अक्षर समान होना,जैसे आपके मिसरे में 'अमावस सा'यानी अमावस शब्द का अतिंम अक्षर 'स' और उसके बाद 'सा' शब्द का पहला अक्षर 'स' समान हैं,उम्मीद है आप समझ गए होंगे ।

ग़ज़ल सीखने के लिए आप ओबीओ पर 'ग़ज़ल की कक्षा' और "ग़ज़ल की बातें" समूह का लाभ ले सकते हैं ।

Comment by Ashish Kumar on December 18, 2018 at 5:43pm

आदरणीय समर कबीर जी नमस्कार,
आपका बहुत बहुत आभार कि आपने गजल की समीक्षा की और त्रुटियाँ बताई।
मैंने अभी शुरुआत की है और गजल के नियमों से भलीभांति परिचित नहीं हूँ।
हालात और जज्बात बहुवचन हैं इनके साथ "हो" के स्थान पर "हों" आना चाहिए ये तो मैं समझ गया हूँ किन्तु "ऐब-ए-तनाफ़ुर" क्या होता है इससे मैं परिचित नहीं हूँ।
यदि इस पर कुछ सहायता मिल जाये तो बड़ा आभार होगा।

पुनः आपका और सभी गुणीजनों का प्रतिक्रिया के लिए आभार।

Comment by राज़ नवादवी on December 8, 2018 at 10:33pm

आदरणीय आशीष जी, गजल का अच्छा प्रयास है, बधाई. बाक़ी मंच के आदरणीय उस्ताज़ समर कबीर साहब ने जो अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रया दी है, उससे ग़ज़ल को संवारने का प्रयास करें. सादर. 

Comment by राज़ नवादवी on December 8, 2018 at 10:12pm

आदरणीय आशीष जी, गजल का अच्छा प्रयास है, बधाई. बाक़ी मंच के आदरणीय उस्ताज़ समर कबीर साहब ने जो अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रया दी है, उससे ग़ज़ल को संवारने का प्रयास करें. सादर. 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 6, 2018 at 6:59pm

आ. आशीष जी, गजल का अच्छा प्रयास हुआ है । हार्दिक बधाई । आ. भाई समर जी की बात का संज्ञान लें ।

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on December 6, 2018 at 4:16pm

आदरणीय आशीष जी अच्छी गजल कही आपने कामयाब कोशिश के लिए बहुत बहुत बधाई

Comment by Samar kabeer on December 5, 2018 at 2:27pm

जनाब आशीष कुमार 'चंदन' जी आदाब,पहली बार आपकी ग़ज़ल से रूबरू हो रहा हूँ ।

बह्र के हिसाब से आपकी ग़ज़ल ठीक है,लेकिन क़वाफ़ी के हिसाब से अभी आपको ग़ज़ल पर और समय देना होगा ।

'  

दुश्मनी को भूल जाऊँ दोस्ती की बात तो हो

नफरतों को छोड़ भी दूँ इश्क़ के हालात तो हो'

मतले के सानी मिसरे में 'हालात' शब्द बहुवचन है इस कारण से रदीफ़ 'हो' कि बजाय "हों" हो रही है ।

'  पर उधर भी तो पिघलता एक भी जज्बात तो हो'

इस मिसरे में भी 'जज़्बात' शब्द बहुवचन है,तो इस कारण से रदीफ़ 'हो' की जगह "हों" हो रही है ।

जिंदगी में छा गया है अब अमावस सा अँधेरा'

इस मिसरे में ऐब-ए-तनाफ़ुर है "अमावस सा" 

जीतना मुमकिन नहीं है फिर चलो अब मात तो हो'

इस मिसरे में भी ऐब-ए-तनाफ़ुर है,"मुमकिन नहीं"

बाक़ी इस प्रयास पर बधाई स्वीकार करें ।

'  

 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari and आशीष यादव are now friends
7 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
7 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
7 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
13 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
13 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
15 hours ago
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
17 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
18 hours ago
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
18 hours ago
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
18 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
18 hours ago
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
18 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service