For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

प्रदीप नील वसिष्ठ's Blog (4)

अन्ना , मेरे भरोसे मत रहना / प्रदीप नील

लगे रहो तुम मेरे प्यारे, पीछे मत हटना अन्ना हज़ारे

सोलह से अनशन ज़रूर करना, अब किसी से ज़रा न डरना

क्योंकि पूरा देश तुम्हारे साथ है

पर ये और बात है,

कि मैं नहीॅं आ पाऊंगा ।

क्योंकि बिजली चोरी करते पकड़ा गया था

ज़ुर्माना भरने अदालत जाऊंगा

मज़बूरी है वर्ना ज़़रूर आता , साथ तुम्हारे नारे लगाता

गली-गली में शोर है, हर एक नेता चोर है ।।

अन्ना, मैं सत्रह को भी नहीं आ पाऊंगा

नया मकान खरीदा है, रजि़स्ट्री कराने जाऊंगा

मैं वहां मौज़ूद रहा तो दो…

Continue

Added by प्रदीप नील वसिष्ठ on December 29, 2015 at 12:49pm — 2 Comments

हां, मैं हत्यारा हूं /प्रदीप नील

मैं खड़ा हूं आपकी अदालत में सर झुकाए

हांलाकि मेरे सर एक भी इलज़ाम नहीं है ।

और ये भी सच है कि दुनिया भर के पुलिस थानों में

किसी भी एफ आई आर में मेरा नाम नहीं है ।

पर इसका मतलब ये नहीं कि मैं निर्दोष हूं, बेचारा हूं

सच तो ये है कि मैं हत्यारा हूं,

हां मैं हत्यारा हूं



मैं हत्यारा हूं अपने बेटे के मासूम बचपन का

मैं हत्यारा हूं अपनी बेटी के खिलते हुए यौवन का

मैं हत्यारा हूं मां-बाप की बूढ़ी आस का

मैं हत्यारा हूं अपनी पत्नी के कमज़ोर से…

Continue

Added by प्रदीप नील वसिष्ठ on December 2, 2015 at 10:00am — 13 Comments

अब ज़रा थक सा गया हूं, मैं

दुनिया देती मुझे बधाई, कि मैं कितना संभल गया

मुझे ग्लानि, आंख में पानी, कि मैं इतना बदल गया

एक समय होता था जब मैं,

न्याय की बात पर अड़ जाता था

आग धधकती थी सीने में

हर जुल्मी से भिड़ जाता था

अब रोज़ द्रौपदी होती नंगी, खून ज़रा भी नहीं खौलता

कोई सूरज को भी चांद कहे तो, चुप रहता हूं नहीं बोलता

कहते हैं सब भला हुआ कि अब चुक सा गया हूं मैं

सच तो ये है लेकिन अब, ज़रा थक सा गया हूं मैं .

थक गया हूं झूठे रिश्तों  का, बोझ…

Continue

Added by प्रदीप नील वसिष्ठ on November 22, 2015 at 10:00am — 11 Comments

मैं कविता क्यों नहीं लिखता

ऐसा नहीं कि मुझे कविता, लिखनी नहीं आती

सच तो ये है कविता मुझसे लिखी नहीं जाती .

कविता लिखने की ललक में, ऐसे उठाता हूं मैं पैन

गर्भवती कोई जैसे छुपके, कच्चा आम लपकती है.

पर बेचारा कोरा कागज़, यूं सहमने लगता है

जैसे गुण्डों से घिरी, कोई अबला मिन्नत करती है.

शील-हरण तो रोज़ ही होते, बड़े शहर के चौराहों पर

लेकिन मुहल्ले की गलियों में, मैली आंख भी नहीं सुहाती.

इसीलिए तो कविता मुझसे लिखी नहीं जाती.

चाहूं तो किसी की झील सी आंखों…

Continue

Added by प्रदीप नील वसिष्ठ on November 13, 2015 at 6:30pm — 14 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
4 hours ago

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
15 hours ago
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
yesterday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
yesterday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
yesterday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
Monday
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे…See More
Monday
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
Monday
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
Monday
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service