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Mukesh Sharma's Blog (2)

आशियाना !

कभी कभी इस दिल में सिसक उठती थी,

की शायद वो दिन भी आयेंगे जब हम भी अपना घर बनायेंगे !

या फिर यूँ ही किराये के मकान में अपना सारा जीवन बिताएंगे !!



माता-पिता की जिम्मेदारियां  इतनी थी की ऐसा ख्वाब भी उन्हें नसीब न था..

कभी हम भी यही सोचा करते थे की क्या हम भी कभी उनका हाथ बटा पाएंगे !!



जिम्मेदारियों के साथ-साथ  बढ़ती महंगाई का साया था..

चाहते हुए भी कभी  घर का सपना बुनना शायद सपने की परछाई थी !

माँ की बीमारियों के साथ, पढाई का खर्च भी उठाना था…

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Added by Mukesh Sharma on September 24, 2012 at 11:06pm — 4 Comments

" समय "

समय के साथ सब बदलता गया , यादें धुंधली होती चली गयी. वो दिन जब स्कूल जाने की चिंता तो थी ; मगर उसी के साथ बेफिक्र ज़िन्दगी जिसमे न तो घर गृहस्ती की चिंता और न ही काम धंधे की फिक्र थी. ये कहानी राजस्थान के एक ऐसे गरीब ब्राह्मन परिवार के लड़के की है जिसका नाम " रवि " था , मगर जो अपने परिवार में रौशनी नहीं कर सका .माँ बाप ने उसके लिए अपनी सारी जिंदगी यूँ ही गुज़ार दी .. समय बीतता चला गया वो अपनी जिंदगी के २१ साल पूरे कर चुका था और उसे जिस मुकाम पर पहुंचाने का सपना उसके माँ बाप का था वो कभी पूरा…

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Added by Mukesh Sharma on September 17, 2012 at 11:00pm — 6 Comments

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