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पंकजोम " प्रेम "'s Blog (8)

" फ़िर ग़ज़ल प्रेम की निशानी की "

बहर - 2122 1212 22 

अपने दुश्मन पे गुलफिशानी की l

आबरू उसकी पानी पानी की ।।

वार मैंने निहत्थों पर न किया

यूँ ...अदा रस्म खानदानी की l

ख़त्म उस ने ही कर दी ऐ - यारो

जिसने शुरू प्यार की कहानी की l

होंठ उनके जब न कह सके सच

फ़िर निग़ाहों ने सच बयानी की l

शख्स वो दोस्तों था पत्थर दिल

खामखाँ उस पे गुलफिशानी की l

सोचा  बेहद  के  क्या रखूँ ता - उम्र

फ़िर ग़ज़ल " प्रेम " की निशानी की…

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Added by पंकजोम " प्रेम " on December 31, 2017 at 1:12pm — 4 Comments

" माँ बाप के चरणों मे दिखती यहाँ जन्नत है "

बहर - 221 1222 221 1222 

ये  मेरा  नहीं  यारो  ये  बुजुर्गों  का  मत है ......

माँ बाप के चरणों में दिखती यहाँ ज़न्नत है ......

बस मेरी ये नादानों से एक शिक़ायत है .....

बेटा लगे प्यारा क्यों बेटी से न चाहत है .....

 

ये  ख़्वाब  नहीं   कोई  ये   एक   हकीक़त  है ....

कुछ लोग कहे उल्फ़त उल्फ़त नहीं आफ़त है ......

संसार में इन दोनों में फ़र्क हैं इतना सा

है हाथ  अगर  बेटा  तो बेटी इबादत है .....



कुछ शख्स ही कह…

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Added by पंकजोम " प्रेम " on December 24, 2017 at 1:37pm — 7 Comments

" नज़रें ज़माने भर की उस इक गुलाब पर हैं "

बहर - 221 2122 221 2122



यूँ मेरी नज़रें ग़ज़लों की हर किताब पर हैं .......

जैसे....... शराबियों की नज़रें शराब पर हैं ....

जब .चल दिया मैं उनकी महफ़िल से तो वो बोले

ठहरो ......कुछेक पल लब मेरे ज़वाब पर हैं .....



हाँ , बेगुनाह होती है अपनी भावनायें

इल्जाम इसलिये तो लगते शबाब पर हैं .....

ऐ - मौला तुम भी रखना अपनी निगाहें उस पर

नज़रें ज़माने भर की उस इक ग़ुलाब पर हैं ......

मैंने चमकने की है जब से यूँ बात…

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Added by पंकजोम " प्रेम " on December 17, 2017 at 9:17pm — 10 Comments

" बच्चा सोता मिला "

बहर - 2122 2122 2122 212



जिंदगी में फिर मुझे बचपन मेरा हँसता मिला ......

जब हुआ बटवारा तो माँ का मुझे कमरा मिला ........



आज़माये थे बहुत पर शख्स हर झूठा मिला ,

तेरे रूप में यार मुझको एक आईना मिला .......



राह में मैंने लिखा देखा था जिस पत्थर पे माँ ......

लौट कर आया तो इक बच्चा वहाँ सोता मिला ......





बुझ गये थे दीप सारे प्यार के उस बस्ती में

दर्द का इक दीप मुझको फिर वहाँ जलता मिला .......





जी रही थी वो फ़क़त सच्ची… Continue

Added by पंकजोम " प्रेम " on December 3, 2017 at 1:23pm — 15 Comments

" शायरी "

वजन - 212 212 212 212



..... " शायरी " .........



मेरे रुख़ की हँसी कौन है , शायरी .....

मेरी जां जिंदगी कौन है , शायरी ....



बेवफ़ाओं के पत्थर दिलों में यहाँ

कील बनकर चुभी कौन है , शायरी.......



ऊँचे उड़ते दिखे है परिंदे , मगर

इन से ऊँची उड़ी कौन है , शायरी ...



मैं अकेला नहीं जागता रातभर

संग फिर जागती कौन है , शायरी ....



ग़म भरे तम दिलों में मेरे दोस्तों

दीप बनकर जली कौन है , शायरी ....



अपने है , दोस्त… Continue

Added by पंकजोम " प्रेम " on November 21, 2017 at 7:12pm — 4 Comments

" पर्दा हटाना हो गया "

बहर - 2122 2122 2122 212



एक तितली का चमन मे आना जाना हो गया .....

देख ..उसको एक गुल यारों दिवाना हो गया ....



उनकी हर तस्वीर मेरे दिल मे धुँधली हो गई

उनको .. देखें दोस्तों जो इक ज़माना हो गया ....



देख मुझको वो मुसलसल मुस्कुराती ही रही

क्या.... सही मेरी निग़ाहों का निशाना हो गया ....



एक बच्चा खा रहा था कूड़े से जूठन , उसे

देखकर ....मेरे लबों से दूर दाना हो गया ..



जी , शहद जितनी मुझे हर पल मिठास आने लगी

अपना रिश्ता लगता… Continue

Added by पंकजोम " प्रेम " on October 22, 2017 at 7:30pm — 16 Comments

" उसको कहते किसान है यारों "

" उसको कहते किसान है यारों "



बहर - 2122 1212 22/112





सबसे जो मूल्यवान है यारों ....

उसको कहते किसान है यारों ....



मौला महफ़ूज आप सब को रखें

आप .....भारत कि शान है यारों ..



फेक दी जिसने बेटी कचरे में

माँ वो कितनी महान है यारों ...



जिंदगी से कहीं ज़ियादा , क्यों

प्यारा लगता श्मशान है यारों ...



झूठ देखों यहाँ पे चीखे और

सच... बना बेजुबान है यारों ...



तीर बस प्यार का चले जिस से

आप...... ऐसी… Continue

Added by पंकजोम " प्रेम " on September 30, 2017 at 7:30pm — 3 Comments

रुख से वो जब पर्दा हटा देगा

बहर - 1222 1222 1222 1222



वो ख़ुद अपनो का मारा हैं नहीं मुझको दग़ा देगा .....

मुहब्बत में यक़ीनन साथ वो मेरा निभा देगा ......





निगाहें देखकर उसकी , उसे कहते कयामत हो

कयामत होगी तब रुख से वो जब पर्दा हटा देगा ....



यहीं तो सोच के मंदिर में जाकर रोता है मुफ़लिस

कि मेरे अश्क़ को इक दिन ख़ुदा मोती बना देगा ......



वो ....बिस्तर मख़मली उसके लिए बेकार है यारों

उसे मेहनत का हासिल इक निवाला ही सुला देगा ....



मिरा घर है अँधेरे में… Continue

Added by पंकजोम " प्रेम " on August 8, 2017 at 4:30pm — 10 Comments

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