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Pankaj Trivedi's Blog (4)

जल - पंकज त्रिवेदी

जल बहता है -

झरनें बनकर, लिए अपनी शुद्धता का बहाव

वन की गहराई को, पेड़, पौधों, बेलों की झूलन को लिए

जानी-अनजानी जड़ीबूटियों के चमत्कारों से समृद्ध होकर

निर्मलता में तैरते पत्थरों को कोमल स्पर्श से शालिग्राम बनाता हुआ

धरती का अमृत बनकर वनवासियों का, प्राणियों का विराम !



जल बहता है -

नदी बनकर, नालों का बोझ उठाती, कूड़ा घसीटती

मंद गति से बहती, अपने निज रंग पर चढी कालिमा को लिए

भटकती है गाँव-शहरों की सरहदों से छिल जाते अपने अस्तित्व को लेकर…

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Added by Pankaj Trivedi on April 2, 2015 at 12:30pm — 15 Comments

आतंक - पंकज त्रिवेदी

वो ख़ूबसूरती नहीं है उनमें 

काली अंधेरी रात सी चमड़ी

जैसे अमावस की रात मुखरित

काली नदी की तरह बहाव है

उन्माद भी उनमें, आग भी 

सीसम की लकड़ी सी चमक भी

मजबूरी से कसमसाती हुई

मर नहीं पाती उनके भोगने तक 

 

ज़िंदगीभर खूबसूरती खोजती

आँखों में चकाचौंध करने वाला

सफ़ेद घोडा दौड़ता है ताकत से

चने खाता तो मानते, जिस्म खाता है

भाता है केवल रूह छोड़कर सबकुछ

 

जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर…

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Added by Pankaj Trivedi on March 31, 2015 at 10:00am — 16 Comments

आज मैंने छूट्टी दे दी है...

आज मैंने छूट्टी दे दी है - 

अनगिनत दुखों को, बेचैनियों को 

ज़िंदगी के अभावों और अनुभवों को 

सगे-संबंधी के रिश्तों की गठरी को 

अपने नाम - शोहरत के बोज को भी 

जगमगाहट भरी भौतिकता की लाईट बंद

अपने नियमों - आग्रहों से दु:खी होनेवाले को 

अपने साथी-संगाथियों से हुई अनबन…

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Added by Pankaj Trivedi on June 27, 2014 at 9:00pm — 10 Comments

एकलव्य - पंकज त्रिवेदी

प्रायश्चित करना चाहिए 
गुरु द्रोण को...
जिन्होंने अपने ज्ञान को 
सीमित रखा उन महाराजा के 
वंशजों के लिए और 
ज्ञान से वंचित रहने लगा 
वो वनवासी !

जिसने सिर्फ मिट्टी के 
गुरु को स्थापित किया 
और धनुर्विद्या में 
महारत हांसिल की |

* * *

(मौलिक व अप्रकाशित)

Added by Pankaj Trivedi on June 27, 2014 at 9:00pm — 8 Comments

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